चंपावत जिले में इस बार सूखे की जबर्दस्त मार पड़ने वाली है। कृषि विभाग ने करीब 35 प्रतिशत खेती चौपट होने का अनुमान लगाया है।
मौसम के हाल न बदले, तो ये आंकड़ा बढ़कर 45 प्रतिशत से भी ज्यादा होने की आशंका है। सबसे ज्यादा मार पर्वतीय क्षेत्रों की फसल में पड़ी है।
किसान सूखे की मार से बेहाल हैं। बारिश न होने से इस बार रबी की फसल व्यापक तौर पर प्रभावित हुई है। मुख्य कृषि अधिकारी (सीएओ) आरएल चंद्रवाल का कहना है कि जिले में 12135 हेक्टेयर कृषि भूमि में से इस बार 10077 हेक्टेयर में ही फसल बोई गई।
1640 हेक्टेयर सिंचित क्षेत्र में तो सूखे का खास असर कम पड़ा। मगर 8437 हेक्टेयर असिंचित जमीन में से 3527 हेक्टेयर (35 प्रतिशत) सूखे की चपेट में आ गई है।
विभाग का कहना है कि सबसे ज्यादा नुकसान गेहूं, मसूर की फसल को हुआ है। इस बार गेहूं करीब 8300 हेक्टेयर, मसूर 1500 हेक्टेयर में बोया गया। सिंचाई साधन वाले मैदानी इलाके टनकपुर-बनबसा में नुकसान कम हुआ है।
इस साल जाड़ों में कम बारिश होने से रबी की फसल पर बुरा असर पड़ा है। कृषि विभाग के मुताबिक जनवरी में मात्र चार मिलीमीटर, फरवरी में 12 एमएम बारिश हुई है, जबकि औसत बारिश जनवरी में 45 एमएम, फरवरी में 57 एमएम होनी चाहिए।
यानि 102 एमएम के सापेक्ष महज 16 एमएम बारिश हुई है। 2015 में जनवरी में 92 मिलीमीटर, फरवरी में 26 एमएम बारिश हुई थी।