नेपाल सीमा से लगे दो जिलों पिथौरागढ़ और चंपावत में तीन साल पूर्व पहला सर्किट हाउस अस्तित्व में आया। मगर चंपावत के इस सर्किट हाउस के हाल बेहद खराब है। करीब 2.5 करोड़ रुपये की लागत की इस खूबसूरत इमारत की देखभाल करने वाला कोई सक्षम अधिकारी नहीं है। सर्किट हाउस एक चतुर्थ कर्मी के हवाले है। सर्किट हाउस राज्य संपत्ति विभाग को हस्तांतरित तो कर दिया गया है, लेकिन पदों का सृजन अब तक नहीं हुआ है।
शहर से करीब आठ किलोमीटर दूर स्थित सर्किट हाउस का उद्घाटन तत्कालीन मुख्यमंत्री हरीश रावत ने मार्च 2014 में किया था। सर्किट हाउस में 2 वीवीआईपी, 3 वीआईपी और 2 जनरल गेस्ट हाउस बनाए गए हैं। 249.40 लाख रुपये की लागत के अलावा इसे 35 लाख रुपये से फर्नीशड भी किया गया है। लेकिन तीन साल से अधिक वक्त बीतने के बावजूद अतिविशिष्ट अतिथियों के लिए बना यह भवन कायदे से संचालित नहीं हो पा रहा है। राज्य संपत्ति विभाग में पदों का सृजन नहीं होने से इस भवन का संचालन लोनिवि कर रहा है। फिलहाल इस भारी-भरकम इमारत की देखरेख और संचालन के लिए एक भी कर्मी विभाग के पास नहीं है। सर्किट हाउस की व्यवस्था के लिए व्यवस्था अधिकारी सहित कुल 13 कार्मिकों की जरूरत है। पर इसमें किसी भी पद का सृजन नहीं हो सका है।
सर्किट हाउस के संचालन के लिए पदों की तैनाती के लिए जिला प्रशासन भी राज्य संपत्ति विभाग को पत्र भेज चुका है। लोक निर्माण विभाग के चंपावत डिवीजन के अधिशासी अभियंता डीडी भट्ट ने बताया कि सर्किट हाउस राज्य संपत्ति विभाग को हस्तांतरित किया जा चुका है। लेकिन देखरेख लोनिवि ही कर रहा है।
ठहर चुके हैं छह वीवीआईपी
इन तीन वर्षों में सर्किट हाउस में चार मंत्री सहित कुल छह अति विशिष्ट लोग (वीवीआईपी) ठहर चुके हैं। वर्तमान भाजपा सरकार में प्रदेश की मंत्री व जिला प्रभारी मंत्री रेखा आर्या और वरिष्ठ कैबिनेट मंत्री यशपाल आर्या भी सर्किट हाउस में आ चुके हैं।
निर्माण में भी खर्च हुई 150 प्रतिशत ज्यादा रकम
सर्किट हाउस वर्ष 2002 में स्वीकृत हुआ था। इसका मूल इस्टीमेट 99.40 रुपये लाख था। लेकिन भूमि चयन में चार साल लगने और फिर धन मिलने में हुई देरी ने इसके काम को बीच-बीच में लटकाए रखा। 2010 में 150 लाख रिलीज होने के बाद काम शुरू हो सका। बहरहाल 99.40 लाख के मूल आगणन के स्थान पर फर्नीचर सहित इसकी लागत बढ़कर 249.40 लाख हो गई। देरी ने अधिक वक्त लगाने के अलावा 150 लाख रुपये की चपत भी लगाई।