पाटी (चंपावत)। देवीधुरा में कुछ लोगों ने प्रवासी नागरिकों को ला रही एक बस को बृहस्पतिवार रात रास्ते में रोक दिया। ग्रामीण पुणे से आए लोगों को देवीधुरा में क्वारंटीन किए जाने पर आपत्ति जता रहे थे। काफी देर तक लगे जाम में नाराज ग्रामीणों ने छिटपुट पथराव भी किया। पथराव से तीन पुलिसकर्मी मामूली रूप से चोटिल हुए हैं। बाद में पाटी की एसडीएम शिप्रा जोशी और चंपावत के सीओ ध्यान सिंह ने मौके पर जाकर हालात को सामान्य कर जाम खुलवाया और प्रवासियों को डिग्री कॉलेज में बने क्वारंटीन सेंटर में भिजवाया। जाम लगाने वालों के माफी मांगने पर उनके खिलाफ मुकदमा दर्ज नहीं किया गया।
पुणे से 26 प्रवासी 27 मई को लोहाघाट पहुंचे थे। पाटी ब्लॉक के इन प्रवासियों को एक दिन लोहाघाट में रखने के बाद 28 मई की शाम देवीधुरा के राजकीय डिग्री कॉलेज में बनाए गए क्वारंटीन सेंटर के लिए रवाना किया गया। पुणे के प्रवासियों को लेकर बस के आने की भनक लगी तो कुछ ग्रामीण बृहस्पतिवार देर शाम को रोड पर एकत्र हो गए और बस को रोक लिया। ग्रामीण बस को देवीधुरा डिग्री कॉलेज नहीं जाने देने पर अड़ गए। दरोगा नवल किशोर के नेतृत्व में मौके पर पहुंची पुलिस टीम ने उन्हें मनाने का प्रयास किया लेकिन वे नहीं माने। इतना ही नहीं, अंधेरे में कुछ लोगों ने पुलिस पर पथराव भी किया। एसओ नारायण सिंह ने बताया कि पथराव में तीन पुलिसकर्मी सतीश राणा, चंद्र सिंह रावत और अनिल कुमार मामूली रूप से चोटिल हुए हैं।
हालात न संभलने पर पाटी की एसडीएम शिप्रा जोशी और सीओ ध्यान सिंह मौके पर पहुंचे और स्थिति को काबू किया। विरोध कर रहे ग्रामीणों को समझा बुझाकर मनाया गया। जाम खुलने के बाद प्रवासी लोग रात करीब 11 बजे देवीधुरा डिग्री कॉलेज पहुंच पाए। भोजन की व्यवस्था के अलावा पुलिस ने प्रवासियों को फल बांटे। बाद में ग्रामीणों के माफी मांगने पर किसी तरह की कार्रवाई के बगैर मामला शांत हो गया। वहीं, ग्रामीणों का कहना है कि वे प्रवासियों का विरोध नहीं कर रहे थे, बल्कि क्वारंटीन सेंटरों में सुविधा बढ़ाने की मांग कर रहे थे।
पथराव करने वालों की पहचान कर होगी कार्रवाई : डीएम
चंपावत। डीएम सुरेंद्र नारायण पांडेय ने कहा कि क्वारंटीन सेंटर भेजे जा रहे प्रवासियों का देवीधुरा में रास्ता रोके जाने की घटना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। भले ही इस मामले में ग्रामीणों ने माफी मांग ली हो, लेकिन पुलिस पर पथराव करने वालों को छोड़ा नहीं जाएगा। ऐसे तत्वों की पहचान कर विधिक कार्रवाई की जाएगी।
खुद कर रहे सोशल डिस्टेंसिंग की अनदेखी
चंपावत। सोशल डिस्टेंसिंग की खुद सरकारी अमला कैसे धज्जियां उड़ा रहा है, इसकी एक बानगी बसों में प्रवासियों को भेजे जाते वक्त नजर आ रही है। देवीधुरा भेजी गई जिस बस को ग्रामीणों ने रोका, उसकी हर सीट पर सवारी थी। वहां सोशल डिस्टेंसिंग का कतई पालन नहीं किया गया, जबकि सामान्य रूप से सार्वजनिक परिवहन में निर्धारित क्षमता से 50 प्रतिशत सवारी भरने का आदेश है।