चंपावत। चंपावत जिले के चौड़कोट गांव के सूरज कुमार (19), राजेश कुमार (23) व हरीश सिंह (27), खेतीखान के दीपक कुमार (27) और बागेश्वर जिले के राजेंद्र कुमार (23) ने जम्मूतवी से 14 मई को अपने घर आने को रेल का टिकट तो लिया, लेकिन वे घर नहीं आ सके। इस वक्त भी वे अनंतनाग में ही फंसे हैं।
अनंतनाग जिले में शेरबाग में एक फैक्ट्री में काम करने वाले पांच युवक लॉकडाउन की वजह से 25 मार्च से बेकाम हो गए थे। ट्रेन चलने पर उन्होंने 14 मई की जम्मूतवी से नई दिल्ली तक आने वाली रेल का टिकट लिया। मगर 13 मई को उन्हें अनंतनाग से आगे नहीं बढ़ने दिया। युवक बताते हैं कि 160 अन्य लोगों के साथ उन्हें अनंतगांव के आईटीआई कैंप में रखा गया है। इन युवकों ने चंपावत जिला प्रशासन और राज्य सरकार से घर वापसी में मदद की गुहार लगाई है।
घर वापसी की गुहार लगा रहे 18 बिहारी मजदूर
चंपावत। बिहार के चंपारण के 18 मजदूर अपने घर जाने को बेताब हैं लेकिन अनुमति नहीं मिलने से घर नहीं जा पा रहे हैं। मजदूरों ने घर वापसी में मदद की प्रशासन से गुहार लगाई है।
जयप्रकाश, सुबोध शाह, अखिलेश पासवान, सुदामा पासवान, रंगीला पासवान, राजकुमार, हरसे आलम, प्रकाश बैठा, रामरतन, प्रमोद पासवान, शिवशंकर शर्मा, समोद पासवान, प्रभु पासवान, राजमंगल पासवान, रवींद्र शाह, रंजन, गोलू पासवान और नरेश पासवान चंपावत में काफी समय से निर्माण मजदूरी करते हैं। 22 मार्च के बाद लॉकडाउन के बाद से परेशान ये मजदूर एक सप्ताह से घर जाने की जुगत में है। कहते हैं कि इसके लिए उन्होंने प्रशासन से गुहार भी लगाई, लेकिन अभी उन्हें अनुमति नहीं मिली। इन मजदूरों का कहना है कि बस की व्यवस्था नहीं होने पर वे पैदल भी घर जाने को तैयार हैं। कहते हैं कि लॉकडाउन में यहां भोजन की व्यवस्था तो प्रशासन ने की, लेकिन उहापोह के बीच अब वे यहां नहीं रहना चाहते। इधर डीएम सुरेंद्र नारायण पांडेय का कहना है कि बिहार के मजदूरों को उनके नगरों को भेजने पर जल्द ही अंतिम निर्णय लिया जाएगा। वहीं पश्चिम बंगाल के 60 लोगों को शनिवार को हरिद्वार भेजा जा रहा है। ये बंगाली प्रवासी हरिद्वार से रविवार को ट्रेन से जाएंगे।