बारिश से पूर्णागिरि मार्ग पर खतरा
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बरसात में मां पूर्णागिरि धाम मार्ग यात्रियों की सुरक्षा के लिहाज से बेहद संवेदनशील बन गया है। किरोड़ा नाले का उफान और बाटनागाड़ के मलबे के साथ ही बाटनागाड़ से लेकर भैरव मंदिर तक कई स्थान डेंजर जोन बन गए हैं। लगातार हो रही बारिश और सड़क की दशा से हादसे का खतरा बना है।
मां पूर्णागिरि धाम की पहाड़ियों को भू-वैज्ञानिक पहले ही कमजोर बताकर अलर्ट कर चुके हैं। पिछले एक दशक के अंदर बरसात में भूस्खलन की तीन बढ़ी घटनाएं हो चुकी है और अब भी आए दिन जगह-जगह भूस्खलन हो रहा है। बाबलीगाड़ के पास सड़क चौड़ीकरण के लिए पहाड़ी काटने से कई पेड़ खतरा बन गए है।
बाटनागाड़ से ठुलीगाड़ तक कटी पहाड़ी में दर्जनों पेड़ ऐसे खड़े हैं, जो कभी हल्का भूस्खलन होने पर धराशायी होकर बड़े हादसे का कारण बन सकते हैं। सड़क की ऐसी दशा और खतरे के बाद भी देवी के दर्शन को भक्तों की आवाजाही जारी है। सुरक्षा के मद्देनजर प्रशासन ने मानसून के आगाज से पहले ही पूर्णागिरि दर्शन पर मौसम के अनुरूप रोक लगा रखी है। बता दें कि प्रशासन ने शाम छह बजे से सुबह पांच बजे तक और बरसात के दिन दर्शन पर पूर्णरूप प्रतिबंध लगाया है।
मंदिर समिति अध्यक्ष किशन तिवारी ने बताया कि खराब मौसम और प्रशासन की मनाही के बाद भी दूर-दराज से कई श्रद्धालु जोखिम उठाकर दर्शन को पहुंच रहे हैं। एसडीएम नरेश दुर्गापाल ने बताया कि मंदिर समिति को प्रशासन के आदेश को सख्ती से लागू करने को कहा गया है।
बाटनागाड़ में मलबा आने से दो घंटे बंद रहा पूर्णागिरि मार्ग
शनिवार रात हुई मूसलाधार बारिश से बाटनागाड़ में मलबा आ गया, जिससे पूर्णागिरि मार्ग रविवार सुबह दो घंटे बंद रहा। लोनिवि के जेई वीएस पोखरिया ने बताया कि मलबा आना कम होते ही विभाग ने जेसीबी से मलबा हटाकर रास्ता खोल दिया था। उन्होंने बताया कि पूर्णागिरि मार्ग बंद न हो इसके लिए एसडीएम के निर्देश पर विभाग ने बाटनागाड़ में एक जेसीबी खड़ी की है। रास्ता बंद होते ही मलबा हटाकर टैक्सी जीपों समेत बड़े वाहनों की आवाजाही लायक रास्ता खोल दिया जा रहा है।