देवी मां के डोले के साथ मां पूर्णागिरि दर्शन को जाते श्रद्घालुओं की टोली।
- फोटो : TANAKPUR
टनकपुर (चंपावत)। पूर्णागिरि मेले में रविवार को साप्ताहिक अवकाश के बावजूद श्रद्धालुओं की संख्या कम रही। इधर दूरदराज से देवी मां का डोला लेकर पैदल आने वाले भक्तों की टोलियों का आने लगी हैं। वहीं व्यवस्थाओं को लेकर मेला प्रशासन गंभीर हो गया है। बूम का विकल्प बने नायकगोठ पार्किंग स्थल में व्यवस्थाएं दुुरुस्त कर दी गई हैं। सुरक्षा के इंतजाम भी पुख्ता कर दिए गए हैं।
पूर्णागिरि मेले में आने वाले श्रद्धालुओं की आवाजाही का ग्राफ हर साल घटता-बढ़ता रहता है। शुरुआत के तीन दिन जहां भीड़ से जबरदस्त रौनक रही, वहीं अब श्रद्धालुओं की संख्या कम हो गई है। एक अप्रैल से कोविड-19 को लेकर लागू एसओपी को इसकी वजह माना जा रहा है। मंदिर समिति अध्यक्ष पं. भुवन चंद्र पांडेय का मानना है कि चैत्र नवरात्रों में फिर श्रद्धालुओं की भीड़ बढ़ेगी। रविवार को पीलीभीत के चांदूपुर कलीनगर, शाहजहांपुर के अल्लाह गंज और पूरनपुर के गजरौला खास से भक्तों की कई टोलियां डोले के साथ देवी मां के दर्शन को पहुंची। चांदूपुर कलीनगर से डोला लेकर आए श्रद्धालु प्रमोद पाल, रामू पाल, राम चंद्र पाल ने बताया कि वे दूसरी बार डोला लेकर मां पूर्णागिरि के दर्शन करने पहुंचे हैं।
कोरोना संक्रमण के बीच मानकों की अनदेखी
कोरोना संक्रमण का खतरा बढ़ रहा है, लेकिन पूर्णागिरि मेले में बचाव के नियमों की अनदेखी हो रही है। एसओपी का कहीं पालन नहीं हो रहा है। श्रद्धालु नियमों को ताख पर रखकर आवाजाही कर रहे हैं।
पुलिस और स्वास्थ्य विभाग ने एक-दो दिन तो जिले की सीमा बनबसा के जगबुड़ा पुल पर चेकिंग की थी, लेकिन भीड़ के कारण अब चेकिंग की महज खानापूरी हो रही है। श्रद्धालु दर्शन के लिए बेरोकटोक आ-जा रहे हैं। टनकपुर से लगे पूर्णागिरि धाम तक मास्क की अनिवार्यता और सुरक्षित दूरी के नियमों का न तो कहीं पालन हो रहा है और न ही नियमों का उल्लंघन करने वालों को कोई पूछने वाला है। (संवाद)