मां पूर्णागिरि के दर्शन के लिए नए साल के पहले दिन श्रद्धालुओं की रिकॉर्ड भीड़ उमड़ी। देश के कोने-कोने से सवा लाख से ज्यादा लोग मां के दरबार पहुंचे। इतनी बड़ी संख्या में आए श्रद्धालुओं के वाहनों से ट्रैफिक प्लान ध्वस्त हो गया। वाहन कई जगह घंटों जाम में फंसे रहे। श्रद्धालुओं को दर्शन के लिए भी घंटों लाइन में खड़े रहना पड़ा। भीड़ के आगे धाम क्षेत्र में तैनात फोर्स नाकाफी नजर आया।
साल की विदाई, नए साल के स्वागत के लिए हर साल मां पूर्णागिरि धाम में काफी संख्या में श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ती है, लेकिन इस बार पिछले वर्षों की अपेक्षा नववर्ष पर रिकॉर्ड भीड़ उमड़ने से प्रशासन की व्यवस्थाएं धरी रह गईं। 31 दिसंबर की दोपहर से दूरदराज से लोगों के आने का सिलसिला शुरू हुआ जो एक जनवरी को भी पूरे दिन लगातार बना रहा। रात 12 बजे से पहले कई जगह भक्तों की टोलियां भजन-कीर्तन में मस्त रही, लेकिन ठीक 12 बजते ही नए साल का स्वागत, एक-दूसरे को बधाई देते हुए श्रद्धालुओं ने मां पूर्णागिरि के दर्शन को मुख्य मंदिर की ओर रुख किया। मुख्य मंदिर की ओर एक साथ भीड़ उमड़ने से वहां तैनात पुलिस प्रशासन के हाथ-पांव फूल गए। सीओ आरएस रौतेला, कोतवाल अरुण कुमार वर्मा को खुद मुख्य मंदिर क्षेत्र में जाकर भीड़ नियंत्रित करने में जुटना पड़ा। आनन-फानन में पीएसी बुलाकर टुन्यास से मुख्य मंदिर तक कई जगह बैरिकेड लगाकर भीड़ रोकनी पड़ी। मंदिर समिति के कार्यकर्ता, धाम क्षेत्र के कई व्यापारी भी पुलिस के साथ व्यवस्था बनाने में जुटे रहे।
बसें पड़ी नाकाफी
टनकपुर। नए साल पर मां पूर्णागिरि धाम में श्रद्धालुओं का भारी सैलाब उमड़ने से रोडवेज प्रबंधन को भी बसों की व्यवस्था करनी पड़ी। टनकपुर डिपो के अलावा उत्तर प्रदेश परिवहन निगम ने भी यात्रियों की भीड़ को देखते हुए टनकपुर-बरेली के बीच अतिरिक्त बसों का संचालन किया, लेकिन ये अतिरिक्त बसें भी यात्रियों की संख्या के आगे कम पड़ र्गइं। लोगों को बसों की छत पर भी सफर करना पड़ा। सहायक मंडलीय प्रबंधक केएस राणा ने बताया कि टनकपुर क्षेत्र को 40 अतिरिक्त बसों की व्यवस्था कर मैदानी रूट पर भेजनी पड़ीं। इसके बावजूद तमाम यात्री बसों का इंतजार करते रहे।
नेपाल के सीमांत बाजारों में भी रही रौनक
टनकपुर। नए साल पर मां पूर्णागिरि धाम में श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ने से पड़ोसी देश नेपाल के सीमांत बाजार ब्रह्मदेव, महेंद्रनगर में भी जबरदस्त रौनक बनी रही। मान्यता के अनुसार पूर्णागिरि के दर्शन के बाद नेपाल स्थित बाबा सिद्धनाथ के दर्शन करने से ही यह धार्मिक यात्रा पूरी होती है। इसी मान्यता के तहत पूर्णागिरि आने वाले भक्त नेपाल जाकर बाबा सिद्धनाथ के दर्शन करते हैं।