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शिलान्यास हुए 30 माह बीतने के बाद भी शुरू नहीं हुआ काम

Mon, 01 Jan 2018 11:07 PM IST
अमर उजाला ब्यूूूूराे चंपावत
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ठुलीगाड़ में रज्जुमार्ग के जून 2015 को तत्कालीन मुख्यमंत्री द्वारा किए गए शिलांयास का पटल। - फोटो : अमर उजाला
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प्रमुख तीर्थ स्थल मां पूर्णागिरि धाम में श्रद्धालुओं की रज्जुमार्ग से देवी दर्शन करने की इच्छा पूरा होने में अभी लंबा समय लगेगा। ठुलीगाड़-मां पूर्णागिरि (रज्जुमार्ग) रोपवे परियोजना के काम में हो रही देरी इसका मुख्य कारण है। करीब ढाई साल पूर्व इसका शिलान्यास होने के बावजूद निर्धारित डेढ़ वर्ष में काम पूरा होना तो दूर, काम का श्रीगणेश तक नहीं हुआ है। और तो और अभी बिजली का संयोजन तक नहीं लिया जा सका है। 29 जनवरी को जिले की प्रभारी मंत्री रेखा आर्या ने काम में देरी पर कंपनी को लताड़ भी लगाई।

पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप मोड में 35 करोड़ रुपये से हनुमान चट्टी से काली मंदिर तक 903.225 मीटर लंबाई का रज्जु मार्ग बनना है। इस काम के लिए राज्य सरकार ने केआर आनंद एंड केआरए इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट प्राइवेट कंपनी के साथ सहमति पत्र (एमओयू) किया था। रोपवे में चार ट्रालियां लगाए जाने, एक घंटे में 800 यात्रियों की आवाजाही और एक दिन में अधिकतम 10 घंटे तक रोपवे को चलाए जाने जैसे कई प्रावधान किए गए थे। 15 जून 2015 को रज्जुमार्ग का तत्कालीन सीएम हरीश रावत ने शिलान्यास भी किया। शिलान्यास हुए तीस माह बीत गए हैं। पेड़ काटे जाने के अलावा अन्य कोई कार्य नहीं हुआ।
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यहां तक कि बिजली का संयोजन भी नहीं लिया जा सका है। यूपीसीएल के अधिशासी अभियंता राजेश कुमार का कहना है कि कंपनी ने थ्री-फेज संयोजन के लिए आवेदन किया था, मगर धन जमा नहीं कराया। जिला पर्यटन अधिकारी लता बिष्ट का कहना है कि रज्जुमार्ग परियोजना का काम शुरू कराने के लिए कंपनी को कई बार कहा जा चुका है। वहीं कंपनी का कहना है कि काम में देरी की वजह जमीन धंसने की आशंका के मद्देनजर चट्टान का दुबारा मृदा परीक्षण कराया जाना रहा। अलबत्ता अब जल्द काम शुरू कर दिया जाएगा।

रज्जुमार्ग बना, तो बुजुर्ग, दिव्यांगों की दर्शन की आश पूरी होगी
रज्जुमार्ग बनने से आम तीर्थयात्रियों के पास चढ़ाई लांघने के अलावा इस रास्ते से जाने का विकल्प तो रहता ही, लेकिन सबसे ज्यादा लाभ बुजुर्ग, बच्चों, दिव्यांगों को होगा। बुजुर्ग, दिव्यांगों की प्रमुख शक्तिपीठ मां पूर्णागिरि धाम के दर्शन करने की आश पूरी हो सकेगी। इससे तीन किमी की पहाड़ी के फासले को पैदल नहीं लांघना पड़ेगा। 70 मिनट के पैदल सफर को रज्जुमार्ग से सिर्फ 10 मिनट में पूरा किया जा सकेगा। काली मंदिर से मुख्य मंदिर की दूरी महज 200 मीटर है। समय की बचत के अलावा पहाड़ में चलने में अक्षम लोग, बड़े-बुजुर्ग, छोटे बच्चे, दिव्यांग भी आसानी से देवी मां के दर्शन कर सकेंगे। मां पूर्णागिरि धाम के पुजारी पंडित किशन तिवारी, मोहन पांडेय, नेत्र बल्लभ तिवारी आदि का कहना है कि रज्जु मार्ग से अधिक तीर्थयात्रियों की आसानी से पहुंच हो सकेगी और धाम को भी प्रसिद्धि मिलेगी। पर्यटन को बढ़ावा मिलने के साथ ही सहूलियत बढ़ने से तीर्थ यात्रियों की तादाद में भी इजाफा होगा।
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कोट
मृदा परीक्षण की दूसरी रिपोर्ट भी आ चुकी है। पूर्णागिरि की चट्टान को रज्जुमार्ग निर्माण के लिए उपयुक्त और सुरक्षित बनाया गया है। अब भी काम में ढिलाई होने पर कंपनी के खिलाफ कार्यवाही की जाएगी।
- डॉ. अहमद इकबाल,
जिलाधिकारी, चंपावत।

रज्जुमार्ग परियोजना से संबंधित मुख्य तथ्य
- हनुमान चट्टी से काली मंदिर तक 903.225 मीटर लंबाई के रोपवे का 10840 वर्ग मीटर का कोरिडोर एरिया है।
- ठुलीगाड़ में प्रशासनिक भवन, पार्किंग, कमरे आदि बनेगा।
- लॉअर टर्मिनल में रोपवे स्टेशन भवन, यात्री होल्डिंग एरिया, टिकट काउंटर, प्रशासनिक कार्यालय, सेवा एरिया, सार्वजनिक सहूलियत होंगी।
- मुख्य मंदिर के पास अपर टर्मिनल बनेगा।
- सुरक्षा के लिए खास तकनीक का उपयोग होगा। गुलमर्ग और त्वांग के रोपवे में लगी विदेशी तकनीक लगेगी।
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