चंपावत। नगर के बालेश्वर मंदिर समूह में खंडित मूर्तियों के संरक्षण की पहल होगी। खंडित मूर्तियों को संग्रहालय में रखने की तैयारी की जा रही है। संग्रहालय निर्माण के लिए भारतीय पुरातत्व विभाग ने प्रशासन से जमीन देने की अपील की है। बालेश्वर मंदिर को राष्ट्रीय विरासत स्मारक के रूप में 1952 से भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण ने संरक्षित किया था। चंद शासकों ने 13वीं सदी में बालेश्वर मंदिर की स्थापना की थी। मंदिर मे मौजूद शिलालेख के अनुसार यह मंदिर 1272 में बना था।
मंदिर के बारे में कहा जाता है कि इसका निर्माण 10 वीं या 12 वीं शताब्दी के मध्य काल में हुआ था। विशालकाय शिलाओं को आपस में ऐसे जोड़ा गया है कि 750 वर्ष बाद भी मंदिर स्थिर है। बालेश्वर मंदिर समूह में 1742 में रुहेलों ने आक्रमण कर मंदिर परिसर में स्थापित सैकड़ों मूर्तियों को खंडित कर दिया गया था। इन मूर्तियों को मंदिर परिसर में किनारों पर रखा गया है, ऐसे में बेजोड़ इतिहास को संजोये इन मूर्तियों को श्रद्धालु और लोगों के लिए देख पाना आसान नहीं होता है। हर मूर्ति की अपने आप में एक विशेषता है।
अधीक्षण पुरातत्वविद् देहरादून मोहन चंद्र जोशी ने कहा कि मंदिर परिसर में रखी खंडित मूर्तियों के लिए संग्रहालय निर्माण की योजना है। परिसर में जगह नहीं है। अगर जिला प्रशासन भूमि उपलब्ध कराता है तो संग्रहालय का निर्माण कर खंडित मूर्तियों को रखा जाएगा। इससे जुड़े इतिहास को भी संग्रहालय में अंकित किया जाएगा। साथ ही अन्य ऐतिहासिक धरोहरों को भी रखा जाएगा। इससे धार्मिक पर्यटन भी बढ़ेगा।