सतीश जोशी सत्तू
चंपावत। जिले के खेतीखन के प्रदीप जोशी जंगली जानवरों से हो रहे नुकसान के कारण खेती करना ही नहीं बल्कि अपने पूर्वजों की विरासत से नाता तोड़ते आ रहे लोगों के लिए ऐसे प्रेरणा स्रोत बने हैं। उन्होंने चंडीगढ़ से यहां आकर अपने पुश्तैनी मकान को आबाद कर उसमें मशरूम के साथ शतावर, कश्मीरी केसर, याकुंन, इटालियन हर्ब ऑरिगेनो, रोजमैरी, ढींगरी मशरूम, बटन मशरूम, पीली-काली हल्दी और कीवी की खेती शुरू की।
वह प्रयोग के तौर पर अन्य दुर्लभ जड़ी बूटियां और औषधीय पौधों को भी उगा रहे हैं। जोशी इटालियन हर्ब ओरिगेनो, रोजमैरी और धूना की खेती भी कर रहे हैं। इसके अलावा इन्होंने दो हजार रुपये प्रति किलो वाली काली हल्दी भी लगाई है। इसमें सामान्य हल्दी की तुलना में दस गुना अधिक एंटीबैक्टीरियल, एंटी फंगल गुण पाए जाते हैं। संवाद
केवीके की उद्यान वैज्ञानिक का मिल रहा है मार्गदर्शन
चंपावत। खेतीखान के प्रदीप जोशी को कृषि विज्ञान केंद्र की उद्यान वैज्ञानिक डॉ. रजनी पंत की ओर से लगातार प्रोत्साहित किया जा रहा है। डॉ. पंत की सलाह पर अब उन्होंने अपने यहां कीवी की व्यापक स्तर पर खेती शुरू कर दी है। इन्हें वैज्ञानिक तरीके से कम भूमि में अधिक उत्पादन की तकनीक बताई जा रही है। संवाद
कोट
प्रगतिशील काश्तकार प्रदीप जोशी क्षेत्र के अन्य काश्तकारों के लिए प्रेरणास्रोत बने हुए हैं। केवीके की ओर से उन्हें पूरा सहयोग दिया जा रहा है। - डॉ. रजनी पंत, उद्यान वैज्ञानिक, केवीके लोहाघाट।