जिले के अकेले आदिम जाति बाहुल्य गांव खिरद्वारी में खेती के लिए पावर विडर पहुंच गया है, लेकिन गांव के लोग अभी इसका उपयोग नहीं कर पा रहे हैं। शनिवार को गांव के वनरावत किसानों ने इसे संचालित करने की कोशिश की मगर नाकाम रहे।
वनरावतों के गांव के काश्तकारों के लिए आजादी के बाद पहली बार खेती से संबंधित कोई उपकरण मिला। यहां की उपजाऊ जमीन में नई तकनीक से खेती के लिए एक पावरविडर दिया गया। शुक्रवार को ये कृषि उपकरण चंपावत से खिरद्वारी तक पहुंच गया। इस उपकरण के खिरद्वारी पहुंचते ही वनरावत खुशी से झूम उठे।
बुजुर्ग वनरावत काश्तकार दान सिंह सहित कई लोगों ने शनिवार को पावर विडर का उपयोग करने का प्रयास किया, लेकिन कोई भी काश्तकार पावर विडर को चला नहीं सका। उपकरण को चलाने का हुनर किसी के पास नहीं है। ग्राम प्रधान लक्ष्मी देवी ने कृषि विभाग से पावर विडर को संचालित करने के लिए ग्रामीणों को प्रशिक्षण देने की मांग की है। अब पावर विडर को ट्रेनिंग मिलने के बाद संचालित करने का ऐलान किया गया। खिरद्वारी में करीब पांच हेक्टेयर इलाके की खेती में यह उपकरण मुफीद होगा।
कृषि अधिकारी डी कुमार का कहना है कि खिरद्वारी को पावरविडर कृषि प्रोत्साहन योजना के तहत दिया गया है। अलबत्ता ग्राम पंचायत ने 3400 रुपए वैट और 600 रुपए भाड़े के रूप में दिया है।