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सप्तेश्वर परियोजना में सात साल से ठप है बिजली उत्पादन

Mon, 17 Apr 2017 10:41 PM IST
सतीश जोशी ‘सत्तू’  ब्यूरो/अमर उजाला, चंपावत।
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electricity price increases - फोटो : Demo Pic
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राज्य की बहुप्रतिक्षित योजनाओं में एक छह हजार मेगावाट से अधिक उत्पादन वाली पंचेश्वर जल विद्युत योजना के निर्माण की पहल शुरू हो गई है। लेकिन लघु जल विद्युत परियोजनाओं को लेकर कोई भी सरकार संजीदा नजर नहीं आ रही है। चंपावत जिले में राज्य बनने के बाद से दो लघु पनबिजली परियोजनाएं चौपट हो गई हैं। इनमें से एक गौड़ी परियोजना तो दो दशक पूर्व बंद हो गई है और वर्तमान में पावर हाउस पूरी तरह से जर्जर हाल में पहुंच चुका है। जबकि सिप्टी घाटी में स्थित सप्तेश्वर लघु जल विद्युत परियोजना में बीते सात सालों से बिजली उत्पादन ठप है। बीते पांच सालों से दोनों ही परियोजनाओं की देखरेख का कार्य उत्तराखंड वैकल्पिक ऊर्जा विभाग (उरेडा) की ओर से किया जा रहा है।
चंपावत जिले में सप्तेश्वर और गौड़ी लघु पनबिजली परियोजनाएं वर्तमान में सफेद हाथी साबित हो रही हैं। माइक्रो हाइडिल की ओर 90 के दशक में सिप्टी घाटी क्षेत्र में सप्तेश्वर नामक स्थान पर लघु बिजली परियोजना स्थापित की गई थी। 300 किलोवाट क्षमता के इस पावर हाउस से उत्पादित बिजली की आपूर्ति सिप्टी क्षेत्र के कोयाटी, मटेला, चिनाखाल, सैदर्क, जमतोला, नौली, सिमाड़, दिगौली, लफड़ा, गड़कोट, डाबरी, चिल्सों, धामीसौन, नरियालगांव सहित तमाम गांवों को दी जाती थी। लेकिन सात वर्ष से इस पावर हाउस से बिजली का उत्पादन बंद है। वहीं गौड़ी लघु जल विद्युत परियोजना भी दो दशकों से ठप है। यहां की पावर चैनल ही क्षतिग्रस्त है। इस परियोजना से कभी चंपावत के आसपास के इलाके जगमग हुआ करते थे। उरेडा के परियोजना प्रबंधक ओम कुमार के अनुसार गौड़ी पावर हाउस को फिर से चालू करने के लिए रुड़की आईआईटी के विशेषज्ञों ने अभी हाल ही गौड़ी का दौरा किया है, जिसकी रिपोर्ट आनी शेष है। यदि रिपोर्ट सकारात्मक आई तो गौड़ी पावर हाउस से बिजली का उत्पादन फिर से शुरू किया जा सकेगा।
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तीन वर्ष के लिए अनुबंध में चलेगी परियोजना
चंपावत। उरेडा विभाग के परियोजना प्रबंधक ओम कुमार का कहना है कि 300 किलोवाट क्षमता की सप्तेश्वर लघु जल विद्युत परियोजना को दोबारा चालू किया जाएगा। इसके लिए विभाग ने नई दिल्ली की एसएस कंस्ट्रक्शन कंपनी से अनुबंध किया है। कंपनी की ओर से वर्तमान में परियोजना की मरम्मत का कार्य शुरू कर दिया है। जल्द ही बिजली उत्पादन भी शुरू हो जाएगा। उन्होंने बताया कि संबंधित कंपनी के साथ तीन साल का अनुबंध किया गया है। इसमें रीडिंग के आधार पर कंपनी को भुगतान किया जाएगा।
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