चंपावत। जिला मुख्यालय से 15 किमी की दूरी पर स्थित सप्तेश्वर लघु जल विद्युत परियोजना में एक बार फिर से बिजली का उत्पादन शुरू हो गया है। उत्तराखंड वैकल्पिक ऊर्जा संस्थान (उरेडा) की ओर से 300 किलोवाट क्षमता की सप्तेश्वर परियोजना का संचालन गैर सरकारी संस्था के सहयोग से किया जा रहा है। सप्तेश्वर पावर हाउस से उत्पादित बिजली को ऊर्जा निगम की ओर से ग्रिड के माध्यम से खरीदा जाएगा। एक दशक बाद फिर से शुरू हुए पावर हाउस में स्थानीय लोगों को रोजगार भी मिल रहा है।
चंपावत जिले में माइक्रो हाइडिल की ओर से 90 के दशक में सिप्टी घाटी क्षेत्र में सप्तेश्वर नामक स्थान पर लघु बिजली परियोजना स्थापित की गई थी। 300 किलोवाट क्षमता के इस पावर हाउस से उत्पादित बिजली की आपूर्ति सिप्टी क्षेत्र के कोयाटी, मटेला, चिनाखाल, सैदर्क, जमतोला, नौली, सिमाड़, दिगौली, लफड़ा, गड़कोट, डाबरी, चिल्सों, धामीसौन, नरियालगांव सहित तमाम गांवों को की जाती थी। पानी की कमी के कारण वर्ष 2010 से इस पावर हाउस से बिजली का उत्पादन ठप हो गया था। उरेडा के परियोजना प्रबंधक मनोज बजेठा ने बताया कि अब पावर हाउस का संचालन पीपीपी मोड में नोएडा की कंपनी को सौंपा गया है। कंपनी की ओर से 150 किलोवाट क्षमता के दो टरबाइनों के जरिये 300 किलोवाट बिजली का उत्पादन शुरू कर दिया गया है।(संवाद)
ऊर्जा निगम ने लगाया अपना मीटर
चंपावत। सप्तेश्वर पावर हाउस में उत्पादित बिजली को ग्रिड के माध्यम से खरीदा जाएगा। ऊर्जा निगम के अधिशासी अभियंता एसके गुप्ता ने बताया कि सप्तेश्वर पावर हाउस में उत्पादित हो रही बिजली की खरीद के लिए ऊर्जा निगम ने अपना मीटर लगाया है। इसकी रीडिंग के आधार पर उरेडा को उत्पादित बिजली का भुगतान किया जाएगा। (संवाद)
गौड़ी पावर हाउस से भी जल्द शुरू होगा उत्पादन
चंपावत। अब जल्द ही गौड़ी पावर हाउस से भी बिजली उत्पादन शुरू हो जाएगा। उरेडा की ओर से तीन सौ किलोवाट क्षमता की गौड़ी पावर हाउस परियोजना के संचालन के लिए एक निजी कंपनी के साथ अनुबंध कर लिया गया है। कंपनी की ओर से पावर हाउस की मरम्मत का कार्य शुरू कर दिया गया है। (संवाद)