एनएचपीसी द्वारा बनाए गए शौचालयों में से कमतर गुणवत्ता वाले शौचालयों की जांच होगी। एनएचपीसी ने जिले के विभिन्न स्कूलों में 304 शौचालयों बनाए थे, जिसमें से करीब 50 शौचालयों की गुणवत्ता पर सवाल उठे थे। शुक्रवार को हुई सर्वशिक्षा अभियान (एसएसए) के अनुश्रवण समिति की बैठक में मुख्य विकास अधिकारी श्याम सिंह पांगती ने ये निर्देश दिए। अभियंताओं की जांच समिति बनाकर एक पखवाड़े के अंतर्गत रिपोर्ट देने की हिदायत दी गई। फुंगर स्कूल में सात शौचालय बनाए जाने के मामले की भी जांच कराई जाएगी।
साथ ही सिंचाई विभाग द्वारा निर्मित खराब विद्यालय भवनों की सूची भी खंड विकास अधिकारियों को उपलब्ध कराने को कहा गया। इस साल निर्मित किए जाने वाले वृहद निर्माण वाले दो-दो विद्यालयों की सूची मुख्य शिक्षा अधिकारी को उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए। दो जोड़ी यूनिफार्म के लिए 400 रुपये की राशि कम होने के चलते इस राशि को बढ़ाने के लिए शासन को पत्र भेजने को कहा गया।
बैठक में शिक्षक वेतन, प्रशिक्षण, बीआरसी, कंप्यूटर ट्रेनिंग, अनुरक्षण अनुदान, बालिका, समेकित शिक्षा, सामुदायिक सहभागिता प्रशिक्षण, निर्माण कार्य वृहद मरम्मत आदि के लिए 25.71 करोड़ रुपये के सापेक्ष 11.49 करोड़ अब तक अवमुक्त किया गया है। इस दौरान डीईओ (प्रारंभिक शिक्षा) सत्यनारायण सिंह, डायट के प्राचार्य केसी शाक्य, आयोजन विकास समिति सदस्य नवीन मुरारी, सांसद प्रतिनिधि गोविंद सामंत, जिला समन्वयक महेश जोशी, एमडीएम विनोद पंत, बीईओ राज संजीवन, आरएस नेगी, महावीर सिंह, मनीष बिष्ट, हरेंद्र साह आदि मौजूद थे।
पेयजल विहीन स्कूलों को मिलेंगे सिंथेटिक टैंक
जिले के 31 प्राइमरी स्कूलों में अब भी पेयजल कनेक्शन नहीं हैं। पानी की व्यवस्था के लिए ऐसे स्कूलों में सिंथेटिक टैंक दिए जाएंगे। सर्वशिक्षा अभियान की रकम से पेयजल विहीन स्कूलों को सिंथेटिक टैंक देने के निर्देश दिए गए।