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बाराकोट और सैलपेडू में एक वोट के अंतर से जीते बीडीसी सदस्य

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प्रतीकात्मक
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जिले में त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव की मतगणना निपटने के बाद जहां विभिन्न पदों पर चुनाव लड़ चुके प्रत्याशियों और समर्थकों के बीच हार और जीत के कारणों की समीक्षा की जा रही है। वहीं मतगणना के दौरान कुछ सीटों पर बेहद कांटे की टक्कर रही।
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पाटी विकासखंड के चौड़ाकोट में ग्राम प्रधान पद पर जीत का अंतर एक वोट का रहा। इसके अलावा क्षेत्र पंचायत सैलपेडू और बाराकोट में भी हारजीत का अंतर महज एक ही वोट रहा। इसके अलावा एक से लेकर दस वोटों के अंतर से सौ से अधिक प्रत्याशियों के बीच हार-जीत तय हुई। जबकि कई स्थानों पर हार-जीत के अंतर से निरस्त वोट अधिक रहे।
पाटी विकासखंड के चौड़ाकोट में ग्राम प्रधान पद पर आशा मौनी ने ममता मौनी को एक वोट से हरा दिया। यहां आशा मौनी को 169 और ममता मौनी को 168 वोट मिले। लोहाघाट विकासखंड के सैलपेडू अनारक्षित बीडीसी सीट पर उमेद सिंह को 185 और भीमदत्त को 186 वोट मिले। इस सीट पर 713 वोटों में 28 वोट खारिज किए गए। इसी प्रकार बाराकोट क्षेत्र पंचायत सीट पर भी हार जीत का अंतर एक ही वोट रहा।
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यहां डाले गए 886 वोटों में जगदीश सिंह अधिकारी को 316 और प्रत्याशी प्रहलाद सिंह अधिकारी को 315 वोट मिले। जबकि 30 मत खारिज कर दिए गए। इसके अलावा पंचायत की सौ से अधिक सीटें ऐसी रहीं जहां हार-जीत का अंतर एक से दस वोट तक ही रहा।
इसमें तामली में ग्राम प्रधान भावना जोशी पांच मतों के अंतर से जीतीं तो मैरोली ग्राम प्रधान पर भाजपा उपाध्यक्ष मुकेश कलखुड़िया केवल सात वोटों से जीते। इसी प्रकार चौड़ा राजपुरा बीडीसी सीट पर राजेश उप्रेती ने दस वोटों के अंतर से जीत हासिल की।
लोकतंत्र में है एक-एक वोट की कीमत
चंपावत। लोकतंत्र के महापर्व में गांव की सरकार बनाने में एक-दो वोटों से हारे प्रत्याशियों को यह हार लंबे समय तक चुभन देती रहेगी। आखिरकार एक दो वोटों के अंतर से हार जीत तय होने पर प्रत्याशियों को मालूम हो गया कि लोकतंत्र में एक-एक वोट की कीमत होती है।
निरस्त वोटों ने की नोटा की कमी पूरी
चंपावत। लोकसभा और विधानसभा चुनाव की तरह भले ही त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव में प्रत्याशी को नकारने का नोटा का विकल्प उपलब्ध नहीं था लेकिन पंचायत के विभिन्न पदों के लिए हुई मतगणना में निरस्त और अवैध वोटों ने नोटा की कमी को पूरा कर दिया।
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