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ग्राम पंचायत सदस्यों की 67 फीसदी सीटें खाली

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मतदान (सांकेतिक तस्वीर)
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त्रिस्तरीय पंचायती चुनाव में सबसे निचली और बुनियादी इकाई ग्राम पंचायत के सदस्यों को लेकर लोगों में कतई उत्साह नहीं है। पंचायत सदस्यों की सीटों में इस बार सिर्फ 33.21 प्रतिशत ही नामांकन हुए हैं। उत्तराखंड बनने के बाद जिले में ग्राम पंचायत में इस बार सर्वाधिक 1528 पद रिक्त हुए हैं। इस वजह से जिले की कई ग्राम पंचायतों के गठन पर तलवार लटकने का खतरा बन गया है।
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चंपावत जिले की 313 ग्राम पंचायतों में कुल 2303 ग्राम पंचायत सदस्य हैं। इन ग्राम पंचायतों में सात से लेकर 15 तक सदस्य हैं। ग्राम पंचायत सदस्यों को मिलाकर ग्राम पंचायत में पांच समितियां गठित होती है। नियोजन एवं विकास, शिक्षा, निर्माण कार्य, स्वास्थ्य एवं कल्याण, प्रशासनिक तथा जल प्रबंधन समिति होती है।
अध्यक्ष के अलावा 4 सदस्यों को मिलाकर बनने वाली इन समितियों की जिम्मेदारी सामूहिक होती है लेकिन इतनी महत्वपूर्ण समितियों में इस बार जिले में ग्राम पंचायत सदस्यों की 2303 सीटों में से महज 775 पर ही पर्चे भरे गए हैं। अधिकतर सीटों पर निर्विरोध निर्वाचन हुआ है।
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जिन ग्राम पंचायतों में सदस्यों की दो-तिहाई सीटें नहीं भर सकेंगी, वहां पंचायतों का गठन नहीं हो सकेगा। ग्राम पंचायतों का गठन होने के बाद ही प्रधान को अधिकार मिलते हैं। रिक्त सीटों पर उप चुनाव होंगे जिसके लिए राज्य निर्वाचन आयोग बाद में अलग से कार्यक्रम तय करेगा।
संजीव रावत, सहायक जिला निर्वाचन अधिकारी, चंपावत।
वर्ष- ग्राम पंचायत सदस्य- नामांकन- रिक्त सीटें
2003- 1727- 1381- 465
2008- 1848- 1678- 493
2014- 2035- 1436- 599
2018- 2303- 775- 1528
मानदेय नहीं मिलने से कम है उत्साह
चंपावत। ग्राम पंचायत सदस्यों के लिए मानदेय का प्रावधान नहीं है। जबकि जिला पंचायत अध्यक्ष से उप प्रधान तक को मानदेय मिलता है। कई पूर्व ग्राम पंचायत सदस्यों का कहना है कि अधिकारों की जानकारी नहीं होने के अलावा मानदेय नहीं होने की वजह से भी सदस्यों में उत्साह नहीं रहता।
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