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इनसे सीखें:उन्होंने सियासत को बनाया सुलह का जरिया

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बापरू के पूर्व ग्राम प्रधान नारायण सिंह फर्त्याल। - फोटो : CHAMPAWAT
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मौजूदा सियासत से ज्यादातर लोग बहुत उम्मीद नहीं पालते हैं मगर पंचायती सियासत में बाराकोट विकासखंड की दो ग्राम पंचायतें इसका अपवाद हैं। बंतोली और बापरू के प्रधानों ने 11 साल पूर्व दो गांवों के बीच के लंबे विवाद को दूर कर लोगों के बीच कड़ुवाहट की दीवार गिराई। यहां के लोग पंचायती चुनाव के दौरान उनके इस काम को खूब याद करते हैं।
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1948 में बापरू और बंतोली ग्राम पंचायत के बीच जंगल का विवाद इस कदर गहराया कि दोनों गांवों के बीच हुक्का-पानी बंद हो गया। 2008 के चुनाव में बापरू के ग्राम प्रधान नारायण सिंह फर्त्याल और बंतोली के प्रधान भवान सिंह फर्त्याल ने आगे बढ़ दोनों गांवों के बीच की कटुता को दूर करने की पहल की। कुछ अड़चनों के बाद उन्हें अपने मकसद में कामयाबी मिली। दोनों गांवों के लोगों ने अपनी-अपनी गलती को मानते हुए गांव के मंदिर में इष्ट देवी को साक्षी मान फिर से दोस्ती के संबंध बनाए।
समाज में तमाम तरह की कुरीतियों पर पड़ रही चोट और तमाम धुर विरोधी देशों के बीच गिरती दीवार ने उन्हें दो पड़ोसी गांवों के बीच कटुता को दूर करने की प्रेरणा दी। लोगों के सहयोग से ये पहल कामयाब भी रही और अब दोनों गांवों में मित्रता है। नारायण सिंह फर्त्याल, पूर्व ग्राम प्रधान, बापरू
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दोनों गावों के बीच लंबा विवाद खत्म होना गांवों के लोगों की सकारात्मक सोच के साथ ही ईश्वरीय कृपा रही। इससे दोनों गांवों के लोगों में विश्वास बहाली हुई और फिर से मैत्रीपूर्ण रिश्ते कायम हुए। तबसे दोनों गांव के लोग एक-दूसरे के सुख-दुख के साथी हैं।
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भवान सिंह फर्त्याल, पूर्व ग्राम प्रधान, बंतोली

बंतोली के पूर्व ग्राम प्रधान भवान सिंह फर्त्याल।- फोटो : CHAMPAWAT

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