2003 तक चंपावत के लोगों को एक मामूली एफआईआर दर्ज कराने के लिए 13 किलोमीटर दूर लोहाघाट की दौड़ लगानी होती थी पर वक्त बदला और अब 2011 के बाद जिला मुख्यालय के लोगों को एक नहीं, दो जगह रिपोर्ट दर्ज करने की सुविधा है, मगर चंपावत की बाजार चौकी सुविधाविहीन है। यहां तक कि एक अदद वाहन भी नहीं है।
चंपावत कोतवाली से संबद्ध बाजार चौकी नगर क्षेत्र में है। इसके अलावा 48 गांवों की व्यवस्था का जिम्मा मुख्य रूप से बाजार चौकी पर है। कोतवाली के करीब चार किलोमीटर दूर होने से यह चौकी कानून-व्यवस्था बनाने में बेहद मददगार है, लेकिन लोगों को सुविधा देने वाली इस चौकी में खुद पुलिस कर्मियों के लिए सुविधाओं का अभाव है।
इस महत्वपूर्ण चौकी में एक चौपहिया वाहन तक नहीं है। फील्ड की पूरी व्यवस्था इकलौती मोटर साइकिल के सहारे है। चौकी में लैंडलाइन फोन तक नहीं है। ऐसे में फरियादी को चौकी इंचार्ज के मोबाइल पर ही संपर्क करना पड़ता है।
हैड कांस्टेबल के बगैर है चौकी
चंपावत बाजार चौकी में स्टाफ भी पर्याप्त नहीं है। एक दरोगा, एक हैड कांस्टेबल और 5 कांस्टेबलों के पद सृजित हैं, लेकिन इसके सापेक्ष एक दरोगा और कांस्टेबल ही है। हैड कांस्टेबल की कुर्सी खाली है। यह काम फिलहाल कांस्टेबल के माध्यम से ही चलाया जा रहा है।
2006 में बनी थी चौकी
चंपावत बाजार चौकी 10 जुलाई 2006 को व्यवस्था बनाने के लिए स्थापित की गई थी, जिसे 12 दिसंबर 2011 को उच्चीकृत कर रिपोर्टिंग चौकी का दर्जा दिया गया। इस चौकी में आवास के अलावा बिजली, पेयजल जैसी सुविधाएं हैं।
चंपावत बाजार चौकी से नगर और आसपास के लोगों को खासी सुविधा है। कोतवाली और चौकी पास होने से इसके लिए चौपहिया वाहन की विशेष जरूरत नहीं है। अलबत्ता कुंभ मेले बाद यहां से 39 किमी दूर एनएच पर स्थित चल्थी रिपोर्टिंग चौकी को चौपहिया वाहन उपलब्ध कराया जाएगा। -दिलीप सिंह कुंवर, पुलिस अधीक्षक, चंपावत।