। पुलिस ने देवीधुरा में पांच दिन पहले हुई भाजयुमो नेता रमेश उर्फ रामू चम्याल की हत्या के मामले का खुलासा कर दिया है। पुलिस ने चार आरोपियों को गिरफ्तार कर 14 दिन की न्यायिक हिरासत में लोहाघाट बंदीगृह भेज दिया है। शुक्रवार को एसपी धीरेंद्र सिंह गुंज्याल ने पत्रकार वार्ता कर हत्याकांड का खुलासा किया
गुंज्याल ने बताया कि 14 जनवरी को त्रिभुवन सिंह चम्याल निवासी पखौटी ने पाटी थाने में सूचना दी कि उसके भाई रमेश उर्फ रामू चम्याल का शव वन विभाग के रेंज कार्यालय के समीप पड़ा है। सूचना मिलते ही पुलिस टीम मौके पर पहुंचकर तफ्तीश शुरू की। पोस्टमार्टम रिपोर्ट और त्रिभुवन चम्याल की तहरीर पर अज्ञात लोगों के खिलाफ आईपीसी की धारा 302 और 201 के तहत मामला दर्ज कार्रवाई की गई।
एसपी ने बताया कि आरोपी जीवन सिंह चम्याल निवासी काफली सुनकोट तहसील धारी जिला नैनीताल हाल निवासी सोनी रेस्टोरेंट देवीधुरा, बसंत सिंह चम्याल निवासी पखौटी थाना पाटी, लक्ष्मण राम उर्फ लच्छू, निवासी लधौन थाना लोहाघाट तथा भूपेंद्र सिंह उर्फ भूप्पी निवासी भैसर्क थाना पाटी ने 14 जनवरी की रात को वारदात को अंजाम दिया था। आरोपियों ने शराब के नशे में चूर होकर भाजयुमो नेता के सिर पर डंडे से वार कर लहूलुहान कर दिया था। बाद में शव घटनास्थल से पांच सौ मीटर दूर ले जाकर फेंक दिया था।
पुलिस ने आरोपियों की निशानदेही पर हत्या में प्रयुक्त किए गए डंडे और अन्य प्रमाणों को भी अपने कब्जे में लिया है। शुक्रवार को आरोपियों को मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेेट के समक्ष पेश किया गया जहां से उन्हें 14 दिन की न्यायिक हिरासत में लोहाघाट बंदीगृह भेज दिया गया है। पुलिस अधीक्षक ने हत्याकांड का खुलासा करने वाली पुलिस टीम की पीठ थपथपाई।
सीसीटीवी फुटेज के बाद मिलाई गईं कड़ियां
चंपावत। पुलिस टीम ने देवीधुरा के सोनी रेस्टोरेंट में लगी सीसीटीवी फुटेज खंगालने के बाद हत्याकांड की कड़ियां मिलाईं। इस दौरान सीसीटीवी में दिखने वाले 300 लोगों के साथ ही 35 अन्य लोगों से पूछताछ की गई। इस मामले में एक चश्मदीद के बयान के बाद पुलिस हत्याकांड का खुलासा करने में कामयाब रही, जिसने रामू और आरोपियों के बीच मारपीट होते देखी थी।
हत्या करने के बाद शव को 500 मीटर दूर फेंका
चंपावत। हत्या के आरोपियों और रामू चम्याल के बीच देवीधुरा के होटल में शराब के नशे में हुई मारपीट के दौरान जब रामू चम्याल की मौत हो गई तो अभियुक्तों के हाथ पांव फूल गए। उसके बाद उन्होंने रात में शव को होटल से घसीट कर 500 मीटर दूर वन विभाग के विश्रामगृह के समीप की झाड़ियों में फेंक दिया था। उसके बाद वापस होटल पहुंचकर उन्होंने फिर से जमकर शराब पी। अगले दिन रेस्टोरेंट स्वामी जीवन चम्याल हल्द्वानी के लिए चला गया।
शराब का नशा और राजनीति का चस्का बना मौत की वजह
चंपावत। देवीधुरा में हुए हत्याकांड में शराब का नशा और राजनीति करने का चस्का रामू चम्याल की मौत का प्रमुख बना। पुलिस के अनुसार 14 जनवरी को रामू चम्याल आरोपी जीवन चम्याल के होटल गया था जहां पर बसंत चम्याल, लक्ष्मण राम, भूपेंद्र सिंह उर्फ भूप्पी पहले से ही शराब के नशे में धुत थे।
इस बीच होटल में पहुंचे रामू चम्याल के बार-बार शराब मांगने को लेकर उसकी जीवन और बसंत के साथ गालीगलौच और मारपीट हो गई। इस बीच जीवन ने उसके सिर पर डंडे से प्रहार कर दिया। डंडे के प्रहार से रामू वहीं पर गिर गया। एसपी धीरेंद्र गुंज्याल के अनुसार आरोपी पहले से ही मृतक के साथ चुनावी रंजिश रखते थे तथा इससे पूर्व भी उनके बीच कई बार हाथापाई और मारपीट की घटनाएं हुई थी।
जीवन और बसंत से थी पुरानी दुश्मनी
चंपावत। पुलिस के अनुसार पूछताछ में पता चला है कि रामू चम्याल पहले से ही शराबी और लड़ाकू प्रवृत्ति का था तथा अक्सर जीवन के होटल में आकर उत्पात मचाता था। जिसकी जानकारी जीवन ने रामू की पत्नी को भी दी थी। आरोपी बसंत के साथ भी रामू की चुनावी रंजिश थी। बसंत इससे पूर्व वन पंचायत का सरपंच था। लेकिन पिछले चुनाव में सरपंच का पद महिला के लिए आरक्षित होने के कारण रामू की पत्नी ने सरपंच चुनाव में बसंत की पत्नी को शिकस्त दी थी। तब से दोनों के बीच दुश्मनी चल रही थी।
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शराब नहीं पी होती तो बच जाता रामू
चंपावत। वारदात के दिन रामू ने अत्यधिक शराब पी थी तथा शारीरिक रूप से मजबूत होने के बावजूद वह अपनी आत्मरक्षा करने में भी सक्षम नहीं रहा। झगड़े में चारों आरोपी रामू पर भारी पड़ गए और उसमें गंभीर चोटें लगने से उसकी मृत्यु हो गई। पुलिस ने चारों आरोपियों को 18 जनवरी को दो बजे वालिक के पास से गिरफ्तार कर लिया था तथा पूछताछ में चारों ने अपराध स्वीकार भी कर लिया है।