आदर्श थाना लोहाघाट जिले का ऐसा थाना है, जिसके बाद पंचेश्वर कोतवाली, चंपावत कोतवाली, तामली, रीठासाहिब, पाटी थाने बने। पहले यह चंपावत तहसील के पहाड़ी क्षेत्र का एकमात्र थाना हुआ करता था। यही तहसील आज जिले का रूप ले चुकी है। थाने की सीमा घाट से मानेश्वर और धूनाघाट से चौखुड़ी तक की है, जिसमें दो तहसीलें आती हैं। वर्तमान में थाना परिसर की चहारदीवारी टूटी है और यहां तैनात पुलिस कर्मियों के आवास की समस्या भी बनी है।
थाने में थानाध्यक्ष समेत दो एसआई और 16 सिपाही तैनात हैं, जिसमें एक महिला एसआई और चार महिला सिपाही शामिल हैं, जबकि मानक और क्षेत्र की संवेदनशीलता को देखते हुए यहां दो हैड कांस्टेबल भी होने चाहिए। पुलिसकर्मी वर्षभर रात में गश्त करते हैं, लेकिन उन्हें अलाव आदि की कोई सुविधा नहीं मिलती है। थाना क्षेत्र में विशेष रूप से मारपीट के मामले अधिक दर्ज होते हैं। लोहाघाट थाने को जिले में आदर्श थाने की संज्ञा दी गई है।
गंभीर है आवास की समस्या
थानाध्यक्ष मनोज रतूड़ी का कहना है कि यहां पुलिस कर्मियों के लिए आवास की सबसे गंभीर समस्या है। थाने के पिछले हिस्से की दीवार टूटने से यहां जानवरों की लगातार आवाजाही रहती है, जिन्हें रोकने के लिए एक आदमी की ड्यूटी लगानी पड़ती है। थाने में 12 सिपाही रात की गश्त में रहते हैं, जिसके कारण अपराधों में अंकुश लगाना संभव हुआ है।
दीवार के लिए की गई है बजट की मांग
पुलिस अधीक्षक डीएस कुुंवर का कहना है कि अपराधों के नियंत्रण एवं अन्य सभी गतिविधियों में लोहाघाट थाने की भूमिका महत्वपूर्ण रहती है। यहां कर्मचारी आवास की समस्या का स्थायी समाधान करने के लिए शासन स्तर पर पहल की जा रही है। इसके अलावा थाने की टूटी हुई दीवार की मरम्मत के लिए भी बजट की मांग की गई है।