टनकपुर (चंपावत)। नवागत एसपी नवनीत सिंह भुल्लर ने यहां जिले के पुलिस और खुफिया महकमे के अधिकारियों की बैठक में कानून व्यवस्था चाकचौबंद करने को लेकर आवश्यक निर्देश दिए। उन्होंने अपने मातहतों को अपराध नियंत्रण के साथ भारत-नेपाल सीमा पर संदिग्धों, अनजान व्यक्तियों पर पैनी नजर रखने के निर्देश दिए।
यहां कोतवाली में आयोजित बैठक में एसपी ने त्योहारों के तहत कानून व्यवस्था सुदृढ़ रखने को लेकर जिले के अधिकारियों की बैठक ली। उन्होंने फरियादियों की बात प्राथमिकता से सुनने, थाने में दर्ज मामलों जिम्मेदारी से निपटाने, फरार वारंटी की धरपकड़ को अभियान चलाने, बॉर्डर पर सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम करने, अवैध शराब के धंधों पर अंकुश लगाने जैसे निर्देश दिए।
उन्होंने आगामी विधानसभा चुनाव के तहत सुरक्षा व्यवस्था को लेकर अपने मातहतों से चर्चा की। रविवार को बारामुला में बीएसएफ शिविर में हुए आतंकी हमले के तहत जिले के प्रवेश द्वार के साथ भारत-नेपाल सीमा पर सतर्कता बरतने और गश्त बढ़ाने को कहा। बैठक में सीओ आरएस रौतेला, वीके आचार्य आदि थे। शाम को एसपी ने जनता की समस्याएं सुनी और उनके सुझावों पर अमल को भरोसा दिया। इस दौरान पालिकाध्यक्ष लक्ष्मी पांडे, जिला पंचायत सदस्य उर्मिला चंद, विमला सजवाण, जगत सिंह रावत, प्रतिभा अग्रवाल, सुरेंद्र गुप्ता आदि थे।
चंपावत। चंपावत जिले में बड़े पैमाने पर थानेदार और दरोगाओं के तबादले किए गए हैं। तीन थानों और एक चौकी के इंचार्ज को इधर से उधर किया गया है। टनकपुर-पिथौरागढ़ राष्ट्रीय राजमार्ग की महत्वपूर्ण चौकी चल्थी के प्रभारी विनोद जोशी को लधिया घाटी के श्रीरीठा साहिब थाने का एसओ बनाया गया है, जबकि श्रीरीठा साहिब के थानाध्यक्ष चंद्रशेखर कन्याल को चंपावत कोतवाली में एसएसआई बनाया गया है।
पाटी के थानेदार बीआर पौरी को इसी पद पर मैदान के थाने बनबसा भेजा गया है, जबकि बनबसा के थानाध्यक्ष विनोद यादव को उनके स्थान पर पाटी थाने की कमान सौंपी गई है। टनकपुर थाने के दरोगा सुरेंद्र सिंह खड़ायत को नेपाल सीमा से लगे पंचेश्वर (किमतोली) कोतवाली भेजा गया है। नैनीताल जिले से यहां स्थानांतरित दरोगा डीएल वर्मा को दूसरी बार लोहाघाट का थानाध्यक्ष बनाया गया है।
पिछले सप्ताह यहां के एसओ मनोज रतूड़ी का यहां से स्थानांतरण हो गया था। इससे पूर्व वर्मा यहां 2003 में थानेदार रह चुके हैं। एसपी नवनीत सिंह भुल्लर ने बताया कि ये तबादले राज्य निर्वाचन आयोग की गाइडलाइन के मुताबिक किए गए हैं। एक विधानसभा क्षेत्र में तीन वर्ष से अधिक समय तक कार्य कर चुके दरोगाओं को दूसरी विधानसभा क्षेत्र में भेजा गया है।