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खेल मैदान के साथ हो रहा ‘खेल’

Sun, 11 Jun 2017 10:18 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो चंपावत
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गोरलचौड़ खेल मैदान - फोटो : Gorlochor Sports Grounds
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 दो-दो मुख्यमंत्रियों के एलान के बावजूद जिला मुख्यालय में स्टेडियम का सपना तो आज तक साकार नहीं हो सका है। मगर शिक्षा विभाग के जिस मैदान में खेल गतिविधियां होती है, वह भी इन दिनों ठप है। मैदान के हाल भी बुरे हैं। इस खेल मैदान का उपयोग खेल से अधिक खेल से इत्तर गतिविधियों के लिए हो रही है। बीते 10 मई से यहां की खेल गतिविधियां प्रभावित हैं। फुटबॉल, क्रिकेट और हॉकी के प्रशिक्षण पर भी इसका असर पड़ रहा है। इन दिनों भी यह मैदान 7 जून से दूसरे कार्यक्रम के लिए सज-संवर रहा है।      
स्टेडियम नहीं होने से चंपावत की तमाम खेल गतिविधियां गोरलचौड़ मैदान में होती है। मगर इन दिनों यह मैदान खेलकूद के लिए कम और दूसरे कामों के लिए अधिक उपयोग में आ रहा है। केंद्र की मोदी सरकार के तीन वर्ष पूरे होने पर 13 जून को इसी मैदान पर सबका साथ सबका विकास कार्यक्रम का आयोजन किया जा रहा है। इस कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में केंद्रीय कपड़ा राज्य मंत्री अजय टम्टा की मौजूदगी रहेगी। 
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मंगलवार को होने वाले कार्यक्रम के लिए मैदान में 7 जून से तमाम व्यवस्थाएं की जा रही है। करीब 2500 लोगों के इस कार्यक्रम में मौजूद रहने के दावे किए जा रहे हैं। इसके लिए गोरलचौड़ मैदान के बड़े हिस्से में टेंट लगाया जा रहा है। टेंट के लिए मैदान में जगह-जगह गड्डे खोदे गए हैं। इसके चलते यहां खेल गतिविधियां ठप है। और 13 जून के कार्यक्रम निपटने के बाद तब तक खेलों का आयोजन नहीं हो सकेगा, जब तक मैदान को समतल कर खेलने लायक नहीं बना दिया जाएगा।      
इससे पूर्व पिछले महीने गोलज्यू ग्रीष्मोत्सव के आयोजन के चलते भी खेल प्रशिक्षण व दूसरी गतिविधियां प्रभावित रही। 10 मई से 20 मई तक होने वाले ग्रीष्मोत्सव की काफी दिन पहले से तैयारी शुरू की गई थी। तब मैदान में सांस्कृतिक आयोजन के अलावा दर्जनों दुकानें, झूले, मौत का कुंआ सहित बाजार की अन्य गतिविधियां हुई। खेल से जुड़े लोगों का कहना है कि खेल के अलावा दूसरे आयोजन होने से मैदान का स्वरूप बिगड़ रहा है। मैदान खेल के लायक नहीं रह गया है।      

      
गोरलचौड़ मैदान खेल विभाग का नहीं है। इसका स्वामित्व शिक्षा विभाग का है। खेल विभाग ने कार्यक्रम से खेल मैदान को नुकसान न पहुंचाने का अनुरोध किया है। कार्यक्रम निपटने के बाद खेल मैदान को ठीक करके देने को कहा गया है।      
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आरएस धामी, जिला क्रीड़ा अधिकारी, चंपावत।      

   
छह माह से लटका है लोहाघाट स्टेडियम का काम      
चंपावत। लोहाघाट के छमनियाचौड़ में निर्माणाधीन स्टेडियम का काम बीते छह माह से ठप है। धन नहीं मिलने इसका निर्माण कार्य अधर लटका है। छमनियाचौड़ में करीब 300 नाली जमीन पर 10.92 करोड़ रुपये की लागत से बन रहे स्टेडियम का निर्माण कार्य उप्र निर्माण निगम स्टेडियम का निर्माण करा रहा है। काम के लिए महज 2.50 करोड़ रुपये ही रिलीज हुए। रिलीज बजट से चहारदीवार, समतलीकरण आदि के काम हुआ है। स्टेडियम के प्रथम चरण में 400 मीटर का ट्रैक, बहुउद्देश्यीय हाल, हॉस्टल, चेजिंग रूम, फुटबाल मैदान आदि प्रस्तावित की गई है। लेकिन धन नहीं मिलने से निर्माण कार्य अधर में लटका हुआ है। जिला क्रीड़ा अधिकारी आरएस धामी ने बताया कि निदेशालय ने पत्र भेज कार्य की प्रगति और अवशेष धनराशि की जानकारी मांगी है। इसके चलते अब विभाग को स्टेडियम निर्माण के लिए शेष बजट जल्दी मिलने की उम्मीद जगी है।      
 
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