लोहाघाट में हैंड पंप से पानी भरते बच्चे।
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नगर और ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल संकट गहराने लगा है। पेयजल स्रोतों में 50 फीसदी से अधिक गिरावट आने के कारण आपूर्ति में दिक्कतें आनी शुरू हो गई हैं। पेयजल योजनाओं से नगर में मांग के अनुरूप मात्र 27 फीसदी ही पानी पहुंच पा रहा है। इसके चलते जल संस्थान द्वारा नगर में कभी दूसरे तो कभी तीसरे पानी दिन आपूर्ति की जा रही है। नलों में पर्याप्त पानी न मिलने के कारण लोगों कोे प्राकृतिक जल स्रोतों से पानी ढ़ोना पड़ रहा है।
लोहाघाट नगर प्रतिदिन करीब 1620 केएल पानी की जरूरत है, लेकिन नगर के लिए बनी चारों पेयजल योजनाओं से इन दिनों मात्र 450 केएल पानी मिल पा रहा है। इसमें चौड़ी लिफ्ट पेयजल योजना से 400 केएल, बनस्वाड़ योजना से 10 केएल, ऋषेश्वर नलकूप से 25 केएल और फोर्ती योजना से मात्र 15 केएल ही पानी मिल पा रहा है। इसके शहर में कभी दूसरे तो कभी तीसरे दिन पानी की आपूर्ति हो रही है। लोगों को हैंडपंपों, नौलों, नर्सरी गधेरे, अक्कल धारे से पानी लाकर प्यास बुझानी पड़ रही है। है। जल संस्थान के अभियंता पवन बिष्ट का कहना है कि पिछले दिनों हुई बारिश से आंशिक राहत मिली थी, लेकिन उसके बाद फिर समस्या गहराने लगी है। उनका कहना है कि विभाग द्वारा टैंकरों से जलापूर्ति करने के लिए टेंडर प्रक्रिया हो रही है।
सात से अधिक गांवों में मचेगा हाहाकार
लोहाघाट (चंपावत)। समय पर बारिश नहीं हुई तो क्षेत्र के सात से अधिक गांवों में पेयजल के लिए हाहाकार मच जाएगा। जल संस्थान की ओर से लोहाघाट विकास खंड में ग्रामीण क्षेत्रों के लिए 64 योजनाएं बनाई गई हैं, जिसमें से अधिकांश योजनाओं के पेयजल स्रोतों में 60 फीसदी तक पानी कम हो गया है। बनगांव, रायनगर चौड़ी, रौंतली माहरा, फोर्ती, चमोला, जिंडी पेयजल योजनाओं के जल स्तर में तेजी से कमी आ रही है। बारिश न होने के कारण इन गांवों में गंभीर पेयजल संकट गहराने के आसार हैं।