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बिन गुरु पढ़ाई कर रहे पीजी कॉलेज के छात्र

Tue, 11 Jul 2017 10:41 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो, चंपावत।
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चंपावत का पीजी कॉलेज - फोटो : अमर उजाला
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चंपावत। किसी भी छात्र के बेहतर भविष्य की बुनियाद होती है उच्च शिक्षा, लेकिन जिला मुख्यालय का पीजी कॉलेज कोई खास उम्मीद नहीं जगाता। शिक्षकों और संसाधनों की कमी छात्रों की राह पर बाधा बन रही है। लैब में उपकरणों की इस कदर कमी है कि विज्ञान वर्ग के 160 छात्र मात्र दस माइक्रोस्कोप के भरोसे बेहतर भविष्य का सपना देख रहे हैं, जबकि कॉमर्स और अंग्रेजी के छात्र बगैर शिक्षक के पढ़ाई कर रहे हैं। चहारदीवारी नहीं होने से कॉलेज में जानवरों की आवाजाही बनी रहती है।
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शिक्षकों और उपकरणों के अभाव में पीजी कॉलेज के छात्रों का भविष्य दांव पर लगा है। 715 की छात्र संख्या वाला बेशक यह पीजी कॉलेज है, लेकिन अंग्रेजी और कॉमर्स विषय शिक्षकविहीन है। अंग्रेजी विषय में कार्यरत शिक्षिका का तबादला होने से यह पद रिक्त चल रहा है, जबकि कॉमर्स विषय में तैनात गेस्ट टीचर ने हाल ही में इस्तीफा दे दिया है।

विज्ञान वर्ग के छात्र-छात्राएं भी कम परेशानी नहीं झेल रहे। लैब में उपकरणों का खासा अभाव है। 160 छात्रों पर मात्र दस माइक्रोस्कोप है, जबकि माइक्रोस्कोप की जरूरत इससे कहीं ज्यादा है। इसके अलावा लैब में मामूली से केमिकल समेत कई संसाधन उपलब्ध ही नहीं हैं।
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स्नातक कला वर्ग में भूगोल और गृहविज्ञान जैसे प्रयोगात्मक विषयों में लैब असिस्टेंट तक की तैनाती नहीं है। इस वजह से इन विषयों में प्रेक्टिकल करना महज खानापूर्ति बना है। महाविद्यालय का अपना खेल मैदान तक नहीं है। इससे यहां के छात्र खेल जैसी बुनियादी सुविधा के लिए जूझ रहे हैं। चहारदीवारी नहीं होने से महाविद्यालय में जानवरों का घूमना आम बात है। साथ ही महाविद्यालय में अतिक्रमण का खतरा भी बना है।

चंपावत। पीजी कॉलेज के पुस्तकालय के भी बुरे हाल हैं। पुस्तकों का अभाव छात्रों को मायूस कर रहा है। पुस्तकालय में इस वक्त तकरीबन दस हजार किताबें उपलब्ध हैं, लेकिन ये नाकाफी हैं। एक छात्र को एक बार में मात्र तीन किताबें देना मजबूरी बना हुआ है।

सिर्फ पांच विषयों में स्थायी शिक्षक तैनात
चंपावत। स्नातक और परास्नातक में 14 विषय स्वीकृत हैं, इनमें से समाजशास्त्र, हिंदी, जंतु विज्ञान, वनस्पति विज्ञान और रसायन विज्ञान में स्थायी शिक्षक तैनात हैं। राजनीति शास्त्र, अर्थशास्त्र, भूगोल, गृह विज्ञान, इतिहास, भौतिक विज्ञान और गणित में गेस्ट टीचरों की तैनाती है, जबकि कॉमर्स और अंग्रेजी विषय के पद रिक्त चल रहे हैं।

पूरे जिले में छह डिग्री कॉलेज
चंपावत। चंपावत जिले में कभी दो डिग्री कॉलेज चंपावत और लोहाघाट हुआ करते थे। राज्य बनने के 17 साल के भीतर इस छोटे से जिले में डिग्री कॉलेज की संख्या छह हो गई है। सुविधाओं के नाम पर सभी डिग्री कॉलेज की स्थिति कमोबेश एक जैसी है। जिले के अन्य महाविद्यालयों में टनकपुर, बनबसा, देवीधुरा और अमोड़ी शामिल हैं।

चंपावत। स्वांला, दियारतोली, सुंई, चल्थी, धौन, अमोड़ी, रमक सहित कई स्कूलों के सैकड़ों छात्र-छात्राएं रोज की तरह मंगलवार को भी अपने विद्यालय पहुंचे। बारिश के मद्देनजर मंगलवार को पहली कक्षा से इंटर तक के विद्यालयों का अवकाश घोषित किया गया था, लेकिन वक्त पर सूचना नहीं मिलने से सैकड़ों छात्र-छात्राएं स्कूल पहुंच गए और वहां शिक्षकों द्वारा जानकारी देने पर फिर वह घरों को वापस हुए। इस पूरी कवायद में छात्रों को फजीहत झेलनी पड़ी। जिले में नौनिहालों तक त्वरित सूचना पहुंचाने का कोई कारगर तरीका शिक्षा विभाग तैयार नहीं कर सका है।

मौसम विभाग की अगले 60 घंटों तक भारी बारिश के पूर्वानुमान के बाद सोमवार शाम जिला प्रशासन की ओर से पहली कक्षा से इंटर तक के सभी शासकीय, अशासकीय एवं निजी मान्यता प्राप्त स्कूलों को मंगलवार को बंद कराने के आदेश दिए गए। शिक्षा अधिकारियों से लेकर प्रधानाचार्यों तक ये आदेश पहुंचे, लेकिन समय पर सूचना नहीं मिलने से दूरदराज के कई स्कूलों के छात्र-छात्राएं लंबी दूरी कर स्कूल पहुंच गए। इनमें से काफी छात्र नालों और कठिन रास्तों को पार कर स्कूल पहुंचे। स्कूल पहुंचने पर आदेश के मुताबिक शिक्षकों ने उन्हें वापस घर भेज दिया।

दूरदराज के स्कूल ही नहीं, चंपावत, लोहाघाट, पाटी, बाराकोट के आसपास के भी कई स्कूलों तक वक्त पर यह जानकारी नहीं पहुंच सकी। चंपावत विवेकानंद विद्या मंदिर इंटर कॉलेज में भी कई छात्र-छात्राएं पहुंच गए। प्रधानाचार्य डा.मदन पाल ने बताया कि इन छात्र-छात्राओं को वापस भेज दिया गया। ऐसे में छुट्टी के एलान के बावजूद कई जगह नौनिहालों को फजीहत झेलनी पड़ी।


निजी स्कूलों में है एसएमएस अलर्ट की व्यवस्था
जिले में पहली कक्षा से इंटर तक के 700 से अधिक सरकारी स्कूल हैं, लेकिन किसी आपात वक्त में छात्रों तक सूचना देने के कोई पुख्ता प्रबंध नहीं है। सिर्फ शिक्षकों के सहारे जानकारी पहुंचाई जाती है, लेकिन ये तरीका बहुत कारगर नहीं है। शिक्षा विभाग में छात्रों या उनके अभिभावकों तक जानकारी देने के लिए एसएमएस अलर्ट की कोई व्यवस्था नहीं है। इसके उलट जिले के ज्यादातर निजी स्कूलों में ऐसी व्यवस्था है। उदयन इंटरनेशनल पब्लिक स्कूल के प्रधानाचार्य विपिन पांडेय का कहना है कि आपदा में स्कूल बंद होने या अन्य महत्वपूर्ण जानकारी को त्वरित गति से अभिभावकों तक पहुंचाने के लिए स्कूल एसएमएस अलर्ट का सहारा लेता है, अगर सरकारी विद्यालयों में ऐसी व्यवस्था होती, तो छात्रों और उनके अभिभावकों के सम्मुख दुविधा की नौबत नहीं आती।

शिक्षकों ने निपटाए कई दूसरे काम
छात्र-छात्राओं की छुट्टी के चलते मंगलवार को शिक्षकों ने मध्यान्ह भोजन योजना, पुस्तकालय, डायरी का रखरखाव सहित कई दूसरे काम निपटाए। वहीं राजकीय शिक्षक संघ का कहना है कि बरसात में आपदा के खतरे के मद्देनजर स्थानीय जरूरत के हिसाब से अवकाश करने की स्कूलों को छूट दी जानी चाहिए। राजकीय शिक्षक संघ के पूर्व जिलाध्यक्ष घनश्याम पांडेय का कहना है कि पूर्व में स्कूलों के प्रधानाचार्य को स्थानीय हालात के हिसाब से निर्णय करने का अधिकार होता था। जिलेभर में एक जैसा निर्णय मैदान-पहाड़ की भौगोलिक परिस्थितियों के अनुरूप भी नहीं है।
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