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कल सचल केंद्रों तक पहुंचाई जाएंगीं दवाएं

Sat, 09 Mar 2019 11:25 PM IST
बृजमोहन बृजमोहन अमर उजाला ब्यूरो चंपावत।
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शनिवार को प्रमुखता से प्रकाशित खबर - फोटो : अमर उजाला
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सरकार का दावा 2022 तक किसानों की आमदनी को दोगुना करने का है। ये आय कब बढ़ेगी इसका तो पता नहीं, लेकिन अभी जिले के आड़ू उत्पादक कीटनाशक दवाओं को पाने के लिए मशक्कत कर रहे हैं। 

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चंपावत के गोदाम में दवा होने के बावजूद इस दवा को सचल केंद्रों में नहीं भेजा गया था। इस वजह से किसानों को ये दवाएं नहीं मिल पा रही थीं। अमर उजाला में शनिवार को यह खबर प्रमुखता से प्रकाशित होने के बाद जिला उद्यान अधिकारी एनके आर्या ने गोदाम प्रभारी को सभी सचल केंद्रों में सोमवार को दवाएं भेजने के निर्देश दिए हैं। चंपावत जिले में 514 हेक्टेयर क्षेत्र में आड़ू की खेती होती है।

पिछले साल इसमें 929 मीट्रिक टन उत्पादन हुआ लेकिन इस बार आड़ू में पड़ने वाली कीटनाशक और फंफूदीनाशक दवाओं के लिए किसान समस्याओं का सामना कर रहे हैं। किसान सचल केंद्रों से लेकर उद्यान विभाग के गोदाम तक चक्कर काट रहे हैं लेकिन चंपावत में दवाएं होने के बावजूद उन्हें ये दवाएं नहीं मिल सकीं।
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देवेंद्र ओली सहित तमाम किसानों का कहना था कि एक हफ्ते के भीतर दवाएं नहीं मिली तो फसल खराब होने का खतरा है। शनिवार को डीएचओ एनके आर्या ने गोदाम प्रभारी को सभी उपलब्ध दवाएं जिले के 12 सचल केंद्रों  (चंपावत, मंच, बस्टिया, सूखीढांग, लोहाघाट, किमतोली, बाराकोट, चौमेल, रौसाल, भिंगराड़ा, देवीधुरा और खेतीखान) में भेजने के निर्देश दिए हैं।  

पौध सुरक्षा लोहाघाट कृषि विज्ञान केंद्र के सहायक निदेशक डॉ. एमपी सिंह का कहना है कि आड़ू के पेड़ की सुरक्षा के लिए फूल लगने से पहले और फल लगने के बाद कीटनाशक दवा डालनी चाहिए। इससे कीटों से सुरक्षा के साथ उत्पादन में भी इजाफा होता है। 

एक दवा नहीं पहुंचने से नहीं भेजीं अन्य दवाएं 
उद्यान विभाग को 1025.50 क्विंटल कीटनाशक दवाएं और 666 लीटर कीटनाशक छिड़काव मिल चुका है। लेकिन एक दवा नहीं आने से ये दवाएं गोदाम में डंप पड़ी थीं। गोदाम प्रभारी आर अवस्थी का कहना है कि पांच में से एक दवा के नहीं पहुंचने से इन दवाओं को सचल केंद्रों में नहीं भेजा गया था। बता दें कि किसानों को ये दवाएं 60 प्रतिशत अनुदान में दी जाती हैं। 

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