बारहमासी सड़क कटिंग के दौरान चंपावत के पास खतरे की जद में आए पेड़।
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टनकपुर-पिथौरागढ़ राष्ट्रीय राजमार्ग पर बारहमासी सड़क की कटिंग की जद में आने वाले पेड़ों का संयुक्त सर्वे राष्ट्रीय राजमार्ग (एनएच) खंड और वन विभाग की टीम ने पूरा कर लिया है। टनकपुर से घाट तक खतरनाक बने करीब 400 पेड़ और काटे जाएंगे।
बारहमासी सड़क की कटिंग के दायरे में पहले ही 7100 पेड़ आ चुके हैं। कटिंग के बाद संयुक्त टीम ने पेड़ों के गिरने के अंदेशे को देखते हुए घाट से टनकपुर तक पेड़ों की दोबारा सर्वे किया। सर्वे के बाद 400 से अधिक पेड़ों को खतरनाक मानते हुए लाल निशान लगाया गया है। लाल निशान लगे पेड़ों को अब वन निगम काटेगा। एनएच ने वन विभाग से पेड़ों को हटाने के लिए अनुमति मांगी है।
धूल से आवाजाही मुश्किल हुई
बारहमासी सड़क की कटिंग से धूल उठ रही है। इसके चलते सड़क पर कई बार सामने से आने वाले वाहन तक नहीं दिखने से आवाजाही खासी खतरनाक साबित हो रही है। लोगों का आरोप है कि जिला प्रशासन के आदेश के बावजूद धूल से बचाव के लिए पर्याप्त मात्रा में पानी का छिड़काव नहीं किया जा रहा है। वहीं काम करा रही कंपनी का कहना है कि धूल से बचाव के लिए छिड़काव के जरूरी इंतजाम किए गए हैं।
कटिंग के बाद गिरने वाले पेड़ों की संख्या लगभग 400 है। इसके लिए वन विभाग को पत्र लिखा गया है। एनएच में पानी के छिड़काव के काम करा रही कंपनी को निर्देश दिए गए हैं।
एलडी मथैला, अधिशासी अभियंता, राष्ट्रीय राजमार्ग खंड, लोहाघाट।