इस साल बनबसा ग्राम पंचायत से अपग्रेड हो नगर पंचायत बन गई है, लेकिन यहां की स्वास्थ्य सेवा बेहतर नहीं हो सकी हैं। जिले के प्रवेशद्वार बनबसा के लोग मामूली इलाज के लिए भी टनकपुर या ऊधमसिंह नगर के खटीमा जाने को मजबूर हैं। अस्पताल में एक डॉक्टर तैनात हैं और वह अपने काम को संजीदगी से कर रहे हैं, लेकिन सुविधाओं की कमी परेशानी का सबब बन रही है।
बनबसा राजकीय एलोपैथिक अस्पताल (एसएडी) की इमारत की भव्यता के अलावा यहां कुछ ठीक नहीं है। इलाज की स्थिति कतई ठीक नहीं है। सोमवार को अमर उजाला की टीम ने अस्पताल का मुआयना किया। डॉक्टर नरेंद्र चंद और फार्मेसिस्ट दोनों अस्पताल में मौजूद थे, लेकिन मरीजों का अकाल था। 10 से12 बजे के बीच पूरे दो घंटे तक एक भी मरीज ने अस्पताल में दस्तक नहीं दी। अलबत्ता कुछ देर बाद एक मरीज की अस्पताल में आमद हुई। अस्पताल में किसी तरह की पैथोलोजी जांच की सुविधा नहीं है। ऐसे में यहां नगर पंचायत के अलावा क्षेत्र की आठ ग्राम पंचायतों की 16 हजार से अधिक आबादी को बीमारी के वक्त रेफर होना मजबूरी है।