मृतक श्रमिक रामबिलास का फाइल फोटो।
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स्टोन क्रशर में कार्यरत श्रमिक की अचानक मौत से शनिवार को खासा बवाल मचा। मृतक श्रमिक के परिजनों ने क्रशर के प्रदूषण से मौत का आरोप लगाया। वहीं, पीड़ित परिवार को उचित मुआवजा दिए जाने की मांग को लेकर आंबेडकर नगर के लोगों ने क्रशर के समीप चक्का जाम कर खनिज निकासी ठप कर दी। करीब दो घंटे तक रहे चक्का जाम के बाद पुलिस की मौजूदगी में क्रशर स्वामी की ओर से श्रमिक के परिवार को डेढ़ लाख रुपये मुआवजा देने के बाद मामला शांत हुआ।
मूल रूप से पीलीभीत के ग्राम खेड़ा जिला पीलीभीत निवासी श्रमिक रामबिलास (45) पुत्र गाकुल प्रसाद यहां आंबेडकर नगर में किराये के मकान में रहकर एक स्टोन क्रशर में पत्थर तोड़ने वाली मशीन में काम करता था। शुक्रवार शाम काम करते वक्त अचानक उसके सीने में दर्द उठा और वहीं गिर पड़ा। क्रशर के अन्य कर्मचारियों ने उसे घर पहुंचाया तो परिजन उसे फौरन संयुक्त चिकित्सालय ले गए, जहां डॉक्टर ने उसे मृत घोषित कर दिया। मृतक की पत्नी मधु देवी ने आरोप लगाया कि क्रशर के प्रदूषण से ही उसके पति की दम घुटकर मौत हुई है।
शनिवार की सुबह श्री विश्वकर्मा समाज सहयोग समिति के लोग मृतक श्रमिक के घर पहुंचे और पीड़ित परिवार को उचित मुआवजा दिए जाने की मांग को लेकर सभासद रईस अहमद के नेतृत्व में क्रशर के समीप चक्का जाम कर खनिज निकासी ठप कर क्रशर स्वामी के खिलाफ नारेबाजी कर प्रदर्शन शुरू कर दिया। उनका कहना था कि श्रमिक की मौत के करीब 14 घंटे बाद भी क्रशर स्वामी मृतक श्रमिक के परिजनों को ढाढ़स बंधाने नहीं आया। सूचना पर पुलिस उप निरीक्षक योगेश दत्त ने प्रदर्शनकारियों को समझाने की कोशिश की लेकिन वे नहीं माने।
बाद में पुलिस के बुलाने पर क्रशर संचालक अमित ठाकुर को मौके पर बुला वार्ता कराई। क्रशर संचालक द्वारा पीड़ित परिवार को डेढ़ लाख रुपये मुआवजा दिए जाने पर मामला शांत हुआ। प्रदर्शन में श्री विश्वकर्मा समाज सहयोग संगठन के अध्यक्ष तिलक राम, महासचिव मुकेश कुमार, कोषाध्यक्ष दुर्गेश कुमार, बबली उर्फ धर्मेंद्र, पिंटू, वीरेंद्र कुमार, रामनाथ, कुसुम, सीता, गीता, प्रेमा, राकेश, अमित, ज्वाला देवी आदि शामिल थीं।