नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) और राष्ट्रीय जनगणना रजिस्टर (एनआरसी) इन दिनों हर जगह चर्चा में है। पूर्वोत्तर सहित देश के कई हिस्सों में इसे लेकर उबाल है। वहीं बहुत लोग खुलकर इसकी हिमायत कर रहे हैं।
देशभर में एनआरसी को लेकर हुए निर्णय से चंपावत जिले में भी लोगों में दस्तावेजों को बनाने की होड़ मच रही है। जिले में स्थायी निवास प्रमाणपत्र न रखने वाले लोग अब इस प्रमाणपत्र सहित अन्य दस्तावेजों को बनाने के लिए कॉमन सर्विस सेंटर (सीएससी) में जुट रहे हैं।
एसडीएम अनिल गर्ब्याल का कहना है कि अब अधिकतर प्रमाणपत्र ऑनलाइन बन रहे हैं, इसलिए इनकी कागजी प्रक्रिया को आवेदक सीएससी से पूरा करता है। बता दें कि भूमि के मालिकाना हक, स्थायी निवास प्रमाणपत्र, सरकारी प्राधिकरण की ओर से जारी लाइसेंस, राशनकार्ड, पासपोर्ट, बैंक-डाकघर में खाता, जन्म प्रमाणपत्र, शिक्षण प्रमाणपत्र, मतदाता सूची, एलआईसी की बीमा पॉलिसी आदि की एनआरसी में शामिल होने के लिए जरूरत पड़ती है।
नागरिकता संशोधन कानून की मंशा सियासी ज्यादा लगती है। कानून में सिर्फ तीन देशों के बजाय भारत से लगे अन्य देशों के अल्पसंख्यकों को भी शामिल किया जाना चाहिए था। दिनेश जोशी, व्यापारी, चंपावत।
नागरिकता संशोधन कानून पूरी तरह देश के लोग और इसकी सुरक्षा के लिए जरूरी है। मोदी सरकार ने इस साहसिक फैसले को लेकर निर्णायक कदम उठाया है। सज्जन वर्मा, पूर्व अध्यक्ष, भेषज संघ।
नागरिकता संशोधन कानून से देश के भीतर के मुस्लिम समाज को डरने की जरूरत नहीं है। यह कानून उनके अधिकारों को किसी तरह से नहीं छीनता है। इकबाल कुरैशी, चंपावत।
नागरिकता संशोधन कानून संविधान की प्रस्तावना पर सीधी चोट है। शरणार्थियों को 20 साल तक मताधिकार नहीं दिया जाए। ताकि इसका सियासी लाभ न मिल सके। नारायण राम, अध्यक्ष, काली कुमाऊं शिल्पकार सभा
सज्जन वर्मा।- फोटो : CHAMPAWAT
दिनेश जोशी।- फोटो : CHAMPAWAT