बनबसा के देवभूमि विद्यापीठ में हुए 39.52 लाख रुपये के छात्रवृत्ति घोटाले की पड़ताल विशेष जांच दल (एसआईटी) ने शुरू कर दी है। मंगलवार को टीम ने खटीमा और आसपास के 200 लोगों से बनबसा में लंबी पूछताछ की। हालांकि अभी कोई खास जानकारी टीम को नहीं मिल सकी है।
एसआईटी के सदस्य जांच अधिकारी टनकपुर के कोतवाल धीरेंद्र कुमार और बनबसा के थानाध्यक्ष जसवीर सिंह चौहान का कहना है कि पुलिस घोटाले के साक्ष्यों को जुटाने के साथ मामले की कड़ी जोड़ने के लिए पूछताछ कर रही है। देवभूमि विद्यापीठ के भवन स्वामी सुखदेव कुमार पुरी से भी भवन के किराये के संबंध में पूछताछ की गई। इस भवन में कुछ वक्त तक यह गैर मान्यता प्राप्त संस्था चली। अब यह दोमंजिली इमारत खाली है।
बनबसा की देवभूमि विद्यापीठ नाम की फर्जी संस्था ने 2015-16 में 221 एससी और 140 एसटी छात्र-छात्राओं की छात्रवृत्ति के नाम पर 39.52 लाख रुपये हड़प लिए। पुलिस की जांच में पाया गया कि समाज कल्याण विभाग से प्राप्त ये रकम इन छात्र-छात्राओं तक नहीं पहुंची। इसके बाद बनबसा थाने में देवभूमि विद्यापीठ के संचालक चैरब जैन, अनिल गोयल, विवेक शर्मा, गौरव जैन, तत्कालीन सहायक समाज कल्याण अधिकारी गोपाल सिंह राणा और बिचौलिये मुकेश कुमार और प्रदीप के खिलाफ आईपीसी की धारा 409, 420, 466, 467, 468, 471 व 120 बी के तहत 15 दिसंबर को मुकदमा दर्ज किया गया।
तत्कालीन समाज कल्याण अधिकारी ने चुप्पी साधी
चंपावत। जांच टीम समाज कल्याण विभाग की भूमिका को भी संदिग्ध मान रही है। इस मामले में सहायक समाज कल्याण अधिकारी गोपाल सिंह राणा को पहले ही नामजद किया जा चुका है लेकिन टीम का मानना है कि इस पूरे मामले में विभाग के कई अन्य लोग भी लिप्त हो सकते हैं। एसआईटी अधिकारी समाज कल्याण विभाग के तत्कालीन अधिकारियों के साथ संबंधित पटल कर्मियों से भी पूछताछ करेंगे। अमर उजाला ने तत्कालीन जिला समाज कल्याण अधिकारी (अब सेवानिवृत्त) पीसी जोशी से मोबाइल पर इस संबंध में जानने का प्रयास किया तो उन्होंने व्यस्तता का हवाला देकर कुछ भी बताने से इनकार कर दिया। कहा कि इस मामले में संबंधित पटल के कर्मी जानकारी दे सकते हैं।