बस्तिया की बाघिन की दहाड़ से डरे हुए हैं गांव के लोग
- फोटो : अमर उजाला
बस्तिया की जिस बाघिन को लोगों ने कुछ दिन पहले आराम से जाने दिया, अब उसी बाघिन से लोग खासे डर गए हैं। शुक्रवार को बस्तिया गांव के लोगों ने तहसीलदार को ज्ञापन सौंपकर बाघिन को पकड़ने की मांग भी की।
आठ अप्रैल को बाघिन ने बस्तिया गांव के बीचो-बीच स्थित बगीचे में डेरा जमा लिया था। यह बाघिन 24 घंटे तक बगीचे में डेरा जमाए रही। बाघिन को पकड़ने के लिए हल्द्वानी से वन विभाग की रेस्क्यू टीम भी बुलाई गई। यह बाघिन रात भर एक बाग में पेड़ पर बैठी रही। अगले दिन वन विभाग का पूरा अमला मौके पर पहुंचा और यहां भारी भीड़ भी जमा हो गई थी। इसके बाद भी यह बाघिन टस से मस नहीं हुई। वन विभाग के अधिकारियों ने इस बाघिन को भगाने के लिए करीब दस गोलियां भी हवा में दागी थीं।
हैरान करने वाली बात यह थी कि यह बाघिन इसके बाद भी टस से मस नहीं हुई। वन विभाग के अधिकारियों का मानना था कि बाघिन डिहाइड्रेशन का शिकार भी हो सकती है और गरमी से परेशान होकर आबादी क्षेत्र में चली आई है। रात को तीन बजे यह बाघिन जंगल की ओर चली गई थी।
अब जंगल से सटे बस्तिया गांव में बाघिन की दहाड़ से ग्रामीणों में दहशत है। ग्रामीणों ने शुक्रवार को तहसीलदार आरके गौतम को ज्ञापन सौंपकर प्रशासन और वन विभाग से गांव के आसपास मंडरा रही बाघिन से सुरक्षा की गुहार लगाई है। प्रधान नवीन बोहरा के नेतृत्व में तहसील पहुंचे ग्रामीणों ने ज्ञापन सौंप सुरक्षा की मांग उठाई है। ग्रामीणों का कहना है कि शाम होते ही गांव के आसपास बाघिन की दहाड़ सुनाई दे रही है, जिससे गांव में दहशत का माहौल बना हुआ है। ग्रामीणों ने बाघिन को पकड़ने की मांग की है। ज्ञापन देने वालों में देवेंद्र सिंह, अमित सिंह, कमल पांडेय, सुंदर सिंह, शंकर सिंह, देवराम, मिलाप सिंह आदि शामिल थे।