मंच/चंपावत। सीमांत मंच के चाय बगान की स्थापना से क्षेत्र के 30 लोगों को रोजगार मिला है। मनरेगा और टी बोर्ड मिलकर इनको अलग-अलग मानदेय देता है। चाय बागान में लगे ये लोग चाय उत्पादन में भूमिका तो निभाते हैं लेकिन इनका मानदेय काफी कम है। इससे दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। क्षेत्र में आठ साल पहले 14 हेक्टेयर भूमि पर चाय बगान की स्थापना हुई थी। इससे स्थानीय लोगों को रोजगार मिला। इसमें 25 महिलाएं और पांच पुरुष कार्यरत हैं जिन्हें साल के प्रत्येक माह के 22 दिन काम मिलता है। इसमें मनरेगा से 247 रुपये का भुगतान 14 दिन और टी बोर्ड 347 रुपये के हिसाब से आठ दिन भुगतान करता है। इतना समय बीतने के बाद भी इनकी आजीविका में सुधार नहीं हुआ है। आज भी कम मानदेय मिलने के कारण यह लोग काम ताे पूरी मेहनत से करते हैं लेकिन उसका लाभ इन्हें नहीं मिल पा रहा है। टी बगान में कार्यरत पुष्पा देवी, कमला देवी ने कहा कि अगर मनरेगा से मजदूरी अधिक मिले तो उनकी आर्थिकी में सुधार होगा।
करीब चार हजार किलो चाय का होता है उत्पादन
चंपावत। वर्तमान में मंच चाय बागान में 14 हेक्टेयर क्षेत्र में साल में करीब तीन से चार हजार किलो चाय का उत्पादन किया जा रहा है। इससे लोगों को आजीविका चलाने में मदद तो मिल रही है लेकिन मजदूरी कम होने के कारण घर चलाना उनके लिए आसान नहीं है। चाय बागान के सुपरवाइजर कमल शर्मा दिसंबर से मार्च तक कटिंग और प्रूनिंग की जाती है। अप्रैल से नवंबर तक चाय तोड़ने का काम होता है। सारी चाय चंपावत फैक्टरी में तैयार होने के लिए भेजी जाती है।
मनरेगा से चाय बगान में काम करने वाले लोगों को मजदूरी कम है। पूरे दिन मेहनत करने के बाद उन्हें न्यूनतम मजदूरी भी नहीं मिल पा रही है। मनरेगा से उनकी मजदूरी बढ़ाने की जरूरत है। महिलाओं को रोजगार देकर आजीविका में सुधार करने का कार्य तो किया जा रहा है लेकिन जब मजदूरी कम होगी तो वह आर्थिक रूप से मजबूत कैसे होंगे। कम से कम 400 रुपये दिए जाने चाहिए।
दीपक महर, ग्राम प्रधान मंच