टनकपुर से लधिया घाटी के फासले को 70 किमी कम करने वाली सूखीढांग-डांडा-मीडार (एसडीएम) सड़क बदहाल है। 56 किमी लंबी सड़क पर डामर नहीं होने से जगह-जगह रोड़े और पत्थर उखड़ने होने से आवाजाही जोखिम भरी है। इस दूरी को तय करने में भी अधिक वक्त लग रहा है।
15 करोड़ रुपये की लागत से 56 किमी लंबे इस मोटर मार्ग की कटिंग तीन वर्ष पूर्व पूरी हुई। इस मार्ग से सूखीढांग, गेरलेख, चौड़ाकोट, धुरा, पातल, मथियाबांज, तलियाबांज, बकोरिया, बुड़म, कल्लाड़, डांडा, कठौती, ककनई की धार, मल्ली टांण, तल्ली टांण, साल, मछियाड़, तलाड़ी, कुल्यालगांव, चौड़ामेहता और रीठा साहिब के लोगों की दूरी कम होने के साथ आवाजाही में वक्त बच रहा है लेकिन डामरीकरण के दूसरे चरण का काम लटका है। दिसंबर में 20 दिन तक निर्माणाधीन बारहमासी मार्ग पर स्वांला के पास मलबा आने से आवाजाही ठप थी।
इस कारण एसडीएम रोड को वैकल्पिक मार्ग के रूप में अपनाया गया। कच्ची सड़क पर अधिक वाहन गुजरने से सड़क खराब हो गई और इन दिनों इस मार्ग का काफी बड़ा हिस्सा रोड़े और पत्थरों से पटा होने से आवाजाही में मुश्किल हो रही है। सामाजिक कार्यकर्ता शंकर दत्त जोशी आदि ने सड़क को जल्द ठीक कराने की मांग की है।
एनएच बंद होने से दिसंबर में एसडीएम रोड से छोटे वाहनों की खूब आवाजाही हुई थी। मार्ग कच्चा होने से कई जगह पत्थर और गिट्टियां ऊपर आ गई हैं। इसे ठीक कराया जा रहा है। साथ ही दूसरे चरण में डामरीकरण के लिए आगणन तैयार किया जा रहा है। राजेंद्र सिंह, कनिष्ठ अभियंता, लोनिवि।