निर्माणाधीन बारहमासी मार्ग में काम से दरकी सिंगदा गांव की जमीन।
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टनकपुर-पिथौरागढ़ राष्ट्रीय राजमार्ग पर निर्माणाधीन बारहमासी सड़क केवल इस मार्ग पर आवाजाही करने वालों के लिए ही मुसीबत नहीं बन रही है बल्कि कई स्थानों पर सड़क के किनारे के खेतों के लिए भी खतरा बन रही है। भारी-भरकम मशीन से चल रहे काम से एनएच के किनारे बसे सिंगदा गांव में सात लोगों के खेतों की मिट्टी दरक रही है।
निर्माणाधीन बारहमासी सड़क पर बाराकोट से घाट के बीच सिंगदा गांव है। पहाड़ी की तरफ स्थित इस गांव के खेतों की मिट्टी दरक रही है। ग्रामीण बताते हैं कि जेसीबी, पोकलैंड और दूसरी उच्च क्षमता की मशीन से चल रहे रोड कटिंग के काम से मिट्टी दरक रही है। ये सिलसिला बीते एक महीने से चल रहा है। अब तक गोपाल सिंह, केदार, दान सिंह, कुंडल सिंह, हरक सिंह, शंकर राम और किशन सिंह के खेतों में दस जगह तीन फुट से दस फुट तक मिट्टी दरक गई है। ग्रामीण किशन सिंह का कहना है कि इस जगह से गांव के लोगों के मकान का फासला बमुश्किल 15 मीटर रह गया है।
बारहमासी मार्ग पर लगातार हो रहे हादसे के बाद से यहां के लोग डरे हुए हैं। नागरिकों का कहना है कि कई बार वे मिट्टी दरकने की समस्या को लेकर राष्ट्रीय राजमार्ग खंड से गुहार लगा चुके हैं लेकिन कोई कदम नहीं उठाया गया। अब वे अगले सप्ताह डीएम से मिलेंगे। एनसी पांडेय, सहायक अभियंता, राष्ट्रीय राजमार्ग खंड, लोहाघाट ने बताया कि बारहमासी मार्ग की कटिंग भारी मशीनों के बगैर संभव नहीं है। सिंगदा गांव के कई ग्रामीणों ने कटिंग से नजदीक की जमीन दरकने की शिकायत की थी। शिकायत के बाद विभाग ने सावधानीपूर्वक काम करने की हिदायत दी है।