नगर में जल संकट गहराता जा रहा है। इन दिनों नगर में चौथे दिन पानी दिया जा रहा है। लोगों को पानी के लिए दिनभर भटकना पड़ रहा है। अक्क्लधारा, नर्सरी गधेरे में दिन भर लोगों की भीड़ रहती है। सुबह से ही लोग वाहनों से पानी ढोने में लग जाते हैं।
उधर,जल संस्थान की ओर से अब दो टैंकरों से बनस्वाड़ पेयजल योजना के टैंक में पानी डाला जा रहा है। जिससे प्रतिदिन 36 हजार लीटर पानी टैंक में पड़ रहा है। बनस्वाड़ पेयजल योजना से अब मात्र 15 से 20 हजार लीटर ही पानी मिल पा रहा है। फोर्ती योजना से आने वाले पानी की मात्रा घटकर अब 10 एलपीएम रह गई है, जबकि इसी गधेरे से चौड़ी लिफ्ट पेयजल योजना में डाले जाने वाले पानी का भी जल स्तर कम होने से अब इस पानी को ऋषेश्वर स्थित नलकूप में जोड़कर लिफ्ट किया जा रहा है। जल संस्थान के अभियंता विशाल सक्सेना का कहना है कि यदि अवर्षण की मौजूदा स्थिति बनी रही तो पानी के ढुलान में और वाहन लगाकर लगभग एक लाख लीटर पानी बनस्वाड़ टैंक में डालने की व्यवस्था की जाएगी।
लाखों रुपये से बनाई गई योजना भी ठप
पाटी (चंपावत)। भिंगराड़ा गांव के लिए स्वजल ने गत वर्ष लाखों रुपये से बनाई गई पेयजल योजना भी ठप हो गई है। योजना का उचित रखरखाव न होने के कारण गांव के 80 परिवार एक एक बूंद पानी के लिए तरसे हुए हैं। गांव के लोग दो किमी दूर दागड़ तोक से पानी भरकर अपनी प्यास बुझा रहे हैं। प्रधान धर्मानंद भट्ट, रमेश भट्ट, उमेश भट्ट, हरीश भट्ट, नंदू भट्ट आदि का कहना है कि पेयजल योजना का रखरखाव नहीं किया जा रहा है, जबकि स्रोत में वर्षा न होने के बावजूद भी पर्याप्त पानी है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि पेयजल की इसी प्रकार की अव्यवस्था जारी रही तो उन्हें आंदोलन करने के लिए बाध्य होना पड़ेगा।