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चंपावत में लगातार बढ़ रही नोटा की ताकत

Fri, 29 Mar 2019 10:58 PM IST
बृजमोहन बृजमोहन अमर उजाला ब्यूरो चंपावत।
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प्रतीकात्मक - फोटो : अमर उजाला
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मई 2014 के लोकसभा चुनाव से शुरू नोटा (नॅन ऑफ दि एबव) की ताकत लगातार बढ़ रही है। इन लोकसभा चुनाव के बाद 2017 में हुए विधानसभा चुनावों में नोटा तीसरे नंबर पर रहा। विजेता और उप विजेता प्रत्याशी के बाद उसे सर्वाधिक वोट मिले। नोटा की ताकत ने तमाम क्षेत्रीय दलों को बहुत पीछे छोड़ा। 

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ईवीएम में नोटा विकल्प का उपयोग सबसे पहली बार 2014 के लोकसभा चुनाव में हुआ था। तब अल्मोड़ा सीट के अंतर्गत आने वाले चंपावत जिले में कुल पड़े 98910 वोटरों में से 2421 लोगों ने नोटा के विकल्प को बेहतर माना। चंपावत विधानसभा सीट पर 1058 और लोहाघाट सीट पर 1363 वोट नोटा को पड़े। इस चुनाव में नोटा को उत्तराखंड क्रांति दल, समाजवादी पार्टी, बहुजन समाज पार्टी, उत्तराखंड परिवर्तन पार्टी सहित कई क्षेत्रीय दल से भी अधिक वोट मिले। पिछले लोकसभा चुनाव के बाद 2017 में हुए विधानसभा चुनाव में भी नोटा तीसरे नंबर पर रहा। चंपावत जिले की दोनों विधानसभा सीटों पर नोटा को कुल 2293 वोट पड़े। ये वोट भाजपा और कांग्रेस के बाद सबसे अधिक थे। चंपावत सीट से भाजपा और कांग्रेस के बाद सबसे ज्यादा 1044 लोगों ने और लोहाघाट सीट में 1249 लोगों ने अन्य प्रत्याशियों की अपेक्षा से नोटा को तरजीह दी। 

सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि नोटा का अधिक उपयोग सियासी दलों के प्रति आक्रोश की अभिव्यक्ति है। ये लोगों के बुनियादी मसलों की अनदेखी करने वाले राजनीतिक दलों से नाराजगी का संकेत है। वहीं आम लोगों का कहना है कि नोटा पर पड़े वोट सियासत पर दूरगामी असर डाल सकते हैं। यह कदम राजनीतिक दलों को सोचने और जमीनी असलियत की अनदेखी करने से रोकने में मददगार हो सकता है। 
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आठ गांवों ने किया चुनाव बहिष्कार का एलान 
चंपावत जिले के आठ गांव अब तक चुनाव बहिष्कार का एलान कर चुके हैं। कफल्टा तल्ला, कफल्टा मल्ला, रूइयां, भंडारबोहरा, मोस्टा बकोड़ा, मटकांडा, मझेड़ा, सिंगदा गांव के लोगों का कहना है कि सड़क जैसी जरूरी सुविधा मुहैया नहीं कराने के चलते वे मतदान से दूर होने को मजबूर हो रहे हैं। वहीं जिला निर्वाचन अधिकारी रणवीर सिंह चौहान का कहना है कि ग्रामीणों को मतदान बहिष्कार नहीं करने के लिए समझाने के साथ ही आचार संहिता हटने के बाद उनकी समस्याओं के निदान के लिए जरूरी कदम उठाए जाएंगे।

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