लधिया घाटी के परेवा सहित कई गांवों को जोड़ने वाला एक मात्र पैदल पुल बेहद खस्ता हाल में है। ढाई दशक पहले बने पैदल पुल पर डामर उखड़ गया है। टिन जगह-जगह टूट चुकी है।
श्रीरीठा साहिब से परेवा के बीच लधिया नदी में 1992 में पैदल झूला पुल बना। लोक निर्माण विभाग द्वारा निर्मित इस पुल से परेवा, मंगललेख, कैड़ागांव, रमक, वारसी, बिनवालगांव, गोलडांडा आदि ग्राम पंचायतों के लोगों की आवाजाही होती है, मगर पिछले काफी समय से 50 मीटर लंबा ये पुल खतरनाक बना हुआ है।
ग्रामीणों का कहना है कि पुल का डामर और टिन जगह-जगह बुरी तरह से टूटी हुआ है। साथ ही पुल के दोनों तरफ बचाव के लिए जाली भी नहीं है। बचाव के लिए बस इक्का दुक्का सरिया लगाई गई है। साइड की रेलिंग में अधिक गेप होने से गिरने का खतरा भी बना रहता है। क्षेत्र पंचायत सदस्य कुंदन सिंह बिष्ट पुल की खस्ता हालत की जानकारी लोनिवि और प्रशासन को कई बार दे चुके हैं, लेकिन अभी तक इसकी मरम्मत नहीं हुई है।
पुल की हालत की जानकारी लेने के लिए विभागीय टीम भेजी जाएगी। टीम की रिपोर्ट के आधार पर पुल की मरम्मत और अन्य जरूरी कदम उठाए जाएंगे। - डीडी भट्ट, अधिशासी अभियंता, लोनिवि, चंपावत।
भेजा गया है मोटर पुल का प्रस्ताव
परेवा सहित कई गांवों को मोटर मार्ग से जोड़ने के लिए एक मोटर पुल प्रस्तावित किया गया है। लोनिवि के अधिशासी अभियंता डीडी भट्ट का कहना है कि श्रीरीठा साहिब से परेवा के बीच 90 मीटर लंबाई का डबल लेन का मोटर पुल प्रस्तावित है। इसके लिए करीब 12 करोड़ रुपये का इस्टीमेट बनाकर प्रस्ताव को पिछले साल शासन को भेजा गया है। स्वीकृति मिलने के बाद इसमें काम शुरू हो सकेगा।