चंपावत। निरक्षरों को साक्षर करने वाले जिले के 578 प्रेरकों का 16 महीने से लंबित मानदेय राज्य परियोजना निदेशालय से अवमुक्त तो हुआ, लेकिन कई प्रेरकों के खातों में मानदेय स्थानांतरित नहीं हो पाया है। इसकी वजह साक्षरता केंद्रों की सामग्री हस्तांतरित न हो पाना है। प्रेरकों का कहना है कि कोरोना काल में स्कूल बंद होने से इस सामग्री के हस्तांतरण में दिक्कत आ रही है।
साक्षर भारत मिशन परियोजना वर्ष 2009 से शुरू हुई थी। इसके तहत जिले में 38617 निरक्षरों को साक्षर बनाने का लक्ष्य था। लक्ष्य पूरा होने के बाद यह परियोजना मार्च 2018 में खत्म हुई, लेकिन योजना खत्म होने के बावजूद जिले के 289 लोक साक्षरता केंद्रों के 289 प्रेरक, 289 सहप्रेरकों को दिसंबर 2016 से मार्च 2018 तक का मानदेय नहीं दिया जा सका था। दो सप्ताह पूर्व मानदेय अवमुक्त तो हुआ , लेकिन अब केंद्रों की सामग्री के हस्तांतरण न होने की वजह से मानदेय की राशि प्रेरकों को नहीं मिल पा रही है। संजय चौड़ाकोटी, गजेंद्र चंद, देवेंद्र देउपा, फकीर सिंह, मीना देवी, किरन जोशी, गीता देवी, कमलापति पांडेय, भागीरथी बोहरा, नरेंद्र सिंह, कलावती नेगी, पूजा चौड़ाकोटी, ललितमोहन जोशी आदि प्रेरकों का कहना है कि स्कूल बंद होने से सामग्री के हस्तांतरण में दिक्कत आ रही है।
प्रेरकों और सह प्रेरकों के मानदेय के लिए मिले 1.99 करोड़ रुपये ब्लॉक शिक्षा कार्यालय केे जरिये प्रेरकों और सह प्रेरकों के खाते में जमा कराए जाएंगे, लेकिन मानदेय के खाते में स्थानांतरित करने से पूर्व प्रेरकों को साक्षरता सामग्री स्कूल के प्रभारियों के सुपुर्द करनी होगी।
- आरसी पुरोहित, सीईओ, चंपावत।