चंपावत जिले में संचालित एक राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय को हाईस्कूल और तीन हाईस्कूलों को इंटरमीडिएट स्तर तक उच्चीकृत होंगे। इसके लिए शासनादेश जारी हो गया है। विद्यालयों के उच्चीकरण से क्षेत्र के छात्र-छात्राओं को स्थानीय स्तर पर आगे की पढ़ाई की सुविधा मिलेगी। इससे विद्यार्थियों को आगे की पढ़ाई के लिए दूर-दराज के क्षेत्रों में नहीं जाना पड़ेगा।
प्रदेश के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में राज्य सरकार ने प्रदेश में शिक्षा व्यवस्था को सुदृढ़ करने और छात्र-छात्राओं को नजदीकी क्षेत्रों में ही बेहतर शैक्षिक सुविधाएं उपलब्ध कराने की दिशा में महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। शासन की ओर से जारी आदेश के अनुसार प्रदेश भर में सात राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालयों को हाईस्कूल और 35 राजकीय हाईस्कूलों को इंटरमीडिएट स्तर पर उच्चीकृत करने की स्वीकृति प्रदान की गई है। इनमें चंपावत जिले के चार विद्यालय शामिल हैं। जिले के लोहाघाट ब्लॉक स्थित राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय पासम को हाईस्कूल स्तर तक् उच्चीकृत किया गया है। वहीं, राजकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय सल्ली, राजकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय पल्सो और राजकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय डूंगरालेटी को इंटरमीडिएट स्तर पर उच्चीकृत करने की स्वीकृति मिली है। विद्यालयों के उच्चीकरण होने के बाद इन क्षेत्रों के छात्र-छात्राओं को स्थानीय स्तर पर ही आगे की पढ़ाई की सुविधा मिल सकेगी। इससे विद्यार्थियों को उच्च शिक्षा के लिए दूर-दराज के क्षेत्रों में जाने की जरूरत नहीं पड़ेगी।
विद्यालयों के लिए प्रधानाचार्य समेत 448 पद होंगे सृजित
विद्यालयों में पदों के समायोजन और नियुक्ति का प्रावधान
उच्चीकृत विद्यालयों में सृजित पदों के सापेक्ष नियुक्तियां निर्धारित सेवा नियमों और प्रक्रिया के तहत की जाएंगी। उच्चीकृत जूनियर हाईस्कूलों में पहले से सृजित पदों के आवश्यक समायोजन की भी व्यवस्था की गई है। इसके अलावा हाईस्कूल से इंटरमीडिएट स्तर पर उच्चीकृत विद्यालयों में कार्यरत प्रधानाध्यापकों के समायोजन के साथ ही पूर्व से सृजित वरिष्ठ सहायक और चतुर्थ श्रेणी के पदों के समायोजन का भी प्रावधान किया गया है।
विद्यालयों के उच्चीकरण से ग्रामीण क्षेत्रों के विद्यार्थियों को लाभ मिलेगा। अब कक्षा आठ के बाद हाईस्कूल और हाईस्कूल के बाद इंटरमीडिएट की शिक्षा के लिए विद्यार्थियों को दूरस्थ विद्यालयों में नहीं जाना पड़ेगा। विद्यार्थियों का समय और संसाधन बचने के साथ ही अभिभावकों पर आवागमन का अतिरिक्त भार भी कम होगा। - मान सिंह बिष्ट, प्रभारी सीईओ, चंपावत