नगर पालिका टनकपुर के रिटायर्ड कर्मियों के लंबित देयकों के भुगतान के मामले में हाईकोर्ट सख्त रुख अपनाया है। कोर्ट ने कहा है कि यदि नगर पालिका भुगतान करने में असमर्थ है तो उसे भंग कर दिया जाए। इसके लिए स्टेट अथॉरिटी को चार सप्ताह के अंदर कार्रवाई के आदेश दिए गए हैं।
पालिका के रिटायर्ड कर्मचारी राकेश ठाकुर, उदय सिंह, खलीक अहमद और मो. खलील ने अपने लंबित देयकों के भुगतान को लेकर नगर पालिका के खिलाफ हाईकोर्ट में याचिका दायर की है। 28 मार्च को न्यायाधीश सुधांशु धुलिया की एकल खंड पीठ ने मामले में सुनवाई करते हुए कहा है कि रिटायर्ड कर्मचारी के लिए जीवन में पेंशन जरूरी है और नगर पालिका उसका भी भुगतान नहीं दे पा रही है।
कोर्ट ने आदेश दिया है कि नगर पालिका परिषद रिटायर्ड कर्मचारियों को सेवानिवृत्ति के लाभों का शीघ्र भुगतान करें अन्यथा नगर पालिका अधिनियम 1916 की धारा 30 के तहत नगर पालिका बोर्ड को भंग कर दिया जाए। कोर्ट ने स्टेट अथॉरिटी को चार सप्ताह के अंदर कार्रवाई करने को कहा है। इधर कोर्ट के आदेश को तीन सप्ताह बीत चुका है, लेकिन अब तक नगर पालिका को शासन से बजट नहीं मिला है।
कोर्ट के आदेश से नगर पालिका में हड़कंप
हाईकोर्ट के आदेश से प्रशासन और नगर पालिका में हड़कंप मचा हुआ है। पालिकाध्यक्ष ने राज्यपाल को पत्र भेजकर कहा है कि सीमित आय के साधन होने के कारण सेवानिवृत्त कर्मियों को पालिका भुगतान करने में असमर्थ है। पालिका ने समय-समय पर कर्मचारियों के लंबित देयकों के भुगतान के लिए शासन से बजट की मांग की गई। शासन ने भी कई बार बकाया देयकों के संबंध में जानकारी मांगी, लेकिन बजट नहीं दिया। पालिका के सेवानिवृत्त कर्मियों को पेंशन, उपदान, एसीपी के लाभ का 2.57 करोड़ रुपये का भुगतान बकाया है।
पालिकाध्यक्ष ने कहा है कि कर्मचारियों की यह देनदारी सिर्फ मौजूदा बोर्ड के समय की ही नहीं है। उन्होंने राज्यपाल से आग्रह किया है कि बोर्ड को भंग करने की नौबत आए तो उससे पहले उनका त्याग पत्र स्वीकार किया जाए। उन्होंने कर्मचारियों की देनदारी निपटाने को शीघ्र बजट दिए जाने की भी गुहार लगाई है।