भांग की खेती नष्ट करने का विरोध
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नारकोटिक्स टीम द्वारा ग्रामीण क्षेत्रों में भांग की खेती को नष्ट किए जाने का लोगों ने विरोध किया है। रायनगर चौड़ी, फोर्ती, खेतीखान, भाटगांव, गोसनी, डिग्डवालगांव और कर्णकरायत क्षेत्र में भांग की खड़ी फसल को नष्ट किया गया है। टीम के इस कदम का ग्रामीणों ने बीडीसी सदस्य सुशीला बोहरा के नेतृत्व में विरोध किया।
ग्रामीण इसका उत्पादन चरस के लिए नहीं, बल्कि अपनी जरूरतों के लिए करते हैं। टीम की ओर से ऐसे समय में फसल को नष्ट किया जा रहा है, जब उसमें न तो बीज ही पका है और नहीं रेशा बना है। मंडी परिषद के पूर्व सदस्य डीडी पांडेय ने भी कार्रवाई का विरोध करते हुए कहा कि भांग लोगों की पारंपरिक खेती है। उधर, नारकोटिक्स टीम का कहना है कि भांग की खेती करना अपराध है। वह पहली बार कानूनी कार्रवाई करने के बजाय इसे नष्ट कर लोगों को चेतावनी दे रहे हैं।
डीएम से मिल प्रधान करेंगे मुआवजे की मांग
लोहाघाट। नारकोटिक्स की टीम के गांव-गांव में जाकर भांग की खेती नष्ट किए जाने पर ग्राम प्रधानों ने नाराजगी जताई है। प्रधानों ने डीएम से मिलकर नष्ट की गई खेती के मुआवजे की मांग की।
शनिवार को ग्राम प्रधान संगठन जिलाध्यक्ष ललित मोहन जोशी की अध्यक्षता और ब्लाक अध्यक्ष चांद सिंह बोहरा के संचालन में हुई बैठक में वक्ताओं ने ग्रामीण क्षेत्रों में भांग की खेती को नष्ट किए जाने पर नाराजगी जताई है। प्रधानों का कहना था कि एक ओर जहां राज्य सरकार भांग की खेती को प्रोत्साहन दे रही है, दूसरी ओर गरीब जनता की मेहनत और पूंजी को बर्बाद करा रही है। प्रधानों ने शीघ्र डीएम से मिलकर लोगों को हो रहे नुकसान का मुआवजा दिए जाने पर जोर दिया।
चरस के व्यापार पर सख्ती से अंकुश लगना चाहिए, लेकिन किसानों की पारंपरिक खेती नष्ट नहीं की जानी चाहिए। बैठक में नसखोला के ग्राम प्रधान दीपक टम्टा, खतेड़ा के महेश सिंह, नाकोट के महेंद्र सिंह, लालमणि राय, विनोद ढेक, महेश जोशी आदि मौजूद थे।