केवल आपदा के समय में ही जागता है तंत्र
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जिले में मानसून के सक्रिय होने के दौरान ही संभावित आपदा से बचाव की कवायद तेज हो जाती है। आपदा प्रबंधन और संबंधित विभागों का तंत्र केवल आपदा के समय में ही जागता है। आपदा से निपटने के लिए आपदा प्रबंधन विभाग के पास भरपूर उपकरण हैं। लेकिन इन उपकरणों का उपयोग कैसे होता है, इसका एक नजारा लोनिवि परिसर में वर्षों से खड़ी क्रेन को देखकर समझा जा सकता है।
वर्ष 2004 में करीब 18 लाख रुपये से खरीदी गई इस क्रेन का कभी भी आपदा से निपटने के लिए उपयोग नहीं किया जा सका। इसकी वजह क्रेन को चलाने के लिए आपरेटर का नहीं होना है। क्रेन का काम सड़क पर आए मलबे को साफ करना था। लेकिन इस क्रेन का उपयोग कभी भी आपदा राहत में नहीं हुआ। लोनिवि के जूनियर इंजीनियर नंदकिशोर भारती का कहना है कि क्रेन चालू हालत में नहीं है। इसके लिए प्रशासन को पत्र भेजा गया है। बहरहाल क्रेन के चारों तरफ घास और लंबी झाड़ियां उग गई है।
कटर की कमी से जूझ रहा है लोक निर्माण विभाग
चंपावत। जिले के आंतरिक मार्गों में दैवीय आपदा से निपटने के लिए लोक निर्माण विभाग की ओर से पुख्ता इंतजाम किए जाने का दावा किया गया है। लेकिन विभाग पेड़ों को काटने वाले कटर की कमी से जूझ रहा है। अधिशासी अभियंता डीडी भट्ट का कहना है कि सड़क बंद होने पर तुरंत खोलने के आदेश अधीनस्थ कर्मचारियों को दिए गए हैं। चंपावत डिवीजन में एक जेसीबी और एक रोबो जेसीबी के अलावा तीन जेसीबी किराए पर ली गई हैं। जिनमें से एक टनकपुर क्षेत्र में तथा दो चंपावत के मंच तामली और खेतीखान चंपावत मोटर मार्ग में तैनात की गई है।
एनएच पर कई स्थानों में खतरनाक पेड़ नहीं काटे गए
टनकपुर-पिथौरागढ़ नेशनल हाइवे में कई स्थानों को आपदा की दृष्टि से चिन्हित किया गया है। लेकिन एनएच के किनारे कई स्थानों में खतरनाक हो चुके पेड़ अब तक नहीं काटे गए हैं। जिससे कभी भी कोई अनहोनी पेश आ सकती है। चंपावत नगर क्षेत्र में पूर्व में खतरनाक हो चुके एक दर्जन से अधिक पेड़ों को वन विभाग की अनुमति के बाद सुरक्षित निस्तारित कर दिया गया था। लेकिन एनएच में अभी भी कई स्थानों में विशालकाय पेड़ खतरे का सबब बने हुए हैं। जो कभी भी हादसे का कारण बन सकते हैं। छतार वार्ड में दो पेड़ों के अलावा बाजार पुलिस चौकी के समीप भी एक पेड़ कभी भी खतरा बन सकते हैं।
उपकरण खरीद के लिए अब स्टीमेट बना रहा एनएच
मानसून की दस्तक देते ही समूचा प्रशासन जहां संभावित आपदा से निपटने के लिए पुरजोर कोशिश कर रहा है। वहीं आपदा की स्थिति में नेशनल हाईवे को खोलने की तैयारियां आधी अधूरी चल रही हैं। एनएच की ओर से आपदा से निपटने के लिए आवश्यक उपकरणों की खरीद के लिए अब जाकर स्टीमेट तैयार किया जा रहा है। इससे सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है कि कब टेंडर प्रक्रिया पूरी होगी और कब उपकरणों की खरीद हो पाएगी। एनएच के धौन क्षेत्र के अवर अभियंता वीरेंद्र कुमार के अनुसार विभाग की ओर से एनएच में आपदा से संबंधित डेंजर जोन चिह्नित किए गए हैं। इसके अलावा सूखीढांग, चल्थी और अमोड़ी में जेसीबी लगाने के साथ ही धौन और भारतोली में किराए की जेसीबी मलबा हटाने के लिए तैनात की गई हैं। इसके अलावा दो कंप्रेशर के साथ ही पर्याप्त संख्या में मैन पावर तैनात की गई है।