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ठसाठस दौड़ती बसों से ठिठका सफर

Sun, 15 Nov 2015 10:24 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, चंपावत
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सुभाष लोहनी, भवान सिंह ओली करीब तीन घंटे तक मोटर स्टेशन रोड पर खड़े रहे। हर आती रोडवेज की बस के साथ उनकी उम्मीद जगती और फिर बस की दशा देख मायूसी। उन जैसी स्थिति ढेरों दूसरे मुसाफिरों की भी थी। ये तमाम लोग दिवाली एवं भैया दूज के बाद वापस अपने कार्यक्षेत्र को जाने के लिए वाहनों का इंतजार करते रहे। घंटों की प्रतीक्षा के बाद आखिर जब बस में सीट का जुगाड़ हुआ, तो सांस में सांस आई।
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11 नवंबर को दिवाली और 13 को भैया दूज निपटा। 14 नवंबर को माह के दूसरे शनिवार की छुट्टी थी। इसके चलते वाहनों पर रविवार को जबर्दस्त लोड था। चंपावत से रोडवेज की कोई सीधी बस किसी भी स्टेशन के लिए नहीं है। यहां के लोगों का सहारा बस पिथौरागढ़ और लोहाघाट से आने वाली बसें होती है, परंतु रविवार को ये बस शुरुआती बिंदु से ही ठसाठस भरी हुई थीं। हल्द्वानी, रुद्रपुर, देहरादून, हरिद्वार, बरेली, लखनऊ और दिल्ली को जाने वालों की यहां बड़ी तादात थी।

रोडवेज के लोहाघाट के सहायक मंडलीय प्रबंधक मोहम्मद बसीर का कहना है कि आमतौर पर लोहाघाट से 15 बसें चलती हैं। पर्व के मद्देनजर दो अतिरिक्त बसें चलाई गई, लेकिन यात्रियों की अधिकता की वजह से ये संख्या भी नाकाफी रही।
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टैक्सी चालकों ने काटी मुसाफिरों की जेब
रोडवेज बसों की कमी की मार मुसाफिरों को जेब ढीली कर चुकानी पड़ी। मैदानी रूटों पर चलने वाले अधिकांश टैक्सी चालकों ने यात्रियों की जेब खूब काटी। मैक्स जीप ने 75 किलोमीटर के लिए 200, लोहाघाट से टनकपुर के 88 किलोमीटर के 250 से 300 रुपये तक वसूले जा रहे थे। मजबूर यात्रियों का कहना था कि वे शिकायत करें, तो किससे। उन्हें तो हर हाल में मंजिल तक पहुंचना है। वहीं, परिवहन विभाग ने भी यात्रियों को इस अंधेरगर्दी से बचाने के लिए कोई विशेष पहल नहीं की। सहायक संभागीय परिवहन अधिकारी रश्मि भट्ट का कहना था कि मुसाफिरों की शिकायत मिलने पर अधिक किराया वसूलने वालों पर कार्रवाई की जाएगी, पर भीड़भाड़ के मौके पर परिवहन विभाग की टीम कहीं नजर नहीं आई।
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