एक कमरा, दो कक्षाएं और 79 छात्र-छात्राएं। अक्सर इस तरह के आकड़ों को सुनकर राजकीय प्राथमिक विद्यालय की तस्वीर उभरती है। लेकिन ये हाल किसी प्राइमरी स्कूल के नहीं, बल्कि डिग्री कालेज के हैं। टनकपुर-पिथौरागढ़ राष्ट्रीय राजमार्ग में स्थित अमोड़ी गांव में 2016 से शुरू राजकीय डिग्री कॉलेज की यह तस्वीर है। कॉलेज खुलने से उच्च शिक्षा ग्रामीण क्षेत्रों विद्यार्थियों के नजदीक तो जरूर आ गई है, लेकिन छात्र-छात्राओं का भविष्य की राह को सुगम करने के लिए इसे गुणवत्ता कतई नहीं मिल सकी है। यहां तक कि यहां की दो कक्षाओं को संचालित करने के लिए कॉलेज के पास दो कमरे तक नहीं हैं। महज एक कमरा है। ऐसे में एक कक्षा तो कमरे में लगती है, जबकि दूसरी कक्षा अक्सर बरामदे में या खुले में चलाने की मजबूरी होती है।
अमोड़ी डिग्री कॉलेज के पास अपना भवन नहीं है। भवन के लिए जमीन की तलाश के बाद निर्माण तो शुरू हो गया, मगर इसके पूरा होने में अभी एक साल से अधिक समय लगेगा। वर्तमान में इस कॉलेज का संचालन अमोड़ी राजकीय इंटर कॉलेज परिसर के दो कमरों में चल रहा है। प्राचार्या कमला जोशी बताती हैं कि इस वक्त कुल 79 छात्र-छात्राएं हैं। एक कमरे का उपयोग प्रशासनिक भवन के रूप में होता है। जबकि दूसरे कमरे में पढ़ाई कराई जाती है। इस साल से स्नातक दूसरे वर्ष की कक्षा भी शुरू हो गई है। ऐसे में एक कमरे में दो कक्षाओं की पढ़ाई बेहद कठिन हो रही है। कॉलेज के सहायक प्रोफेसर सुनील दिवाकर बताते हैं कि कॉलेज खुलने से दूरदराज गांव के छात्र-छात्राओं का फासला जरूर कम हुआ है, लेकिन जगह से लेकर फर्नीचर व अन्य जरूरी संसाधनों की कमी का असर पड़ रहा है। दो स्थाई शिक्षकों के अलावा चार विजिटिंग शिक्षकों से पढ़ाई का काम चलाया जा रहा है।
राज्य बनने के बाद खुले चार नए कॉलेज
उत्तराखंड राज्य बनने के बाद चंपावत जिले में चार नए राजकीय डिग्री कॉलेज खुले। इनमें से टनकपुर महाविद्यालय को छोड़ शेष तीन बस नाम के कॉलेज हैं। बनबसा कॉलेज अस्पताल के आवासीय परिसर में चल रहा है। इसी तरह देवीधुरा डिग्री कॉलेज का संचालन जिला पंचायत के विश्रामगृह में हो रहा है। और अमोड़ी की दो कक्षाओं को चलाने के लिए तो दो कमरें तक नहीं है।
अंग्रेजी के शिक्षक के बगैर इम्तिहान दे रहे छात्र
अमोड़ी डिग्री कॉलेज में हिंदी, अंग्रेजी, इतिहास, राजनीति विज्ञान, अर्थशास्त्र, शिक्षा शास्त्र व संस्कृत विषय स्वीकृत हैं। और ये सभी संचालित हो रहे हैं। मगर अंग्रेजी विषय को पढ़ाने के लिए अभी तक शिक्षक की तैनाती नहीं हो सकी है। और छात्र-छात्राओं को शिक्षक के बगैर इस कठिन विषय का इम्तिहान देने की मजबूरी है। वहीं यहां का परीक्षा केंद्र भी 25 किलोमीटर दूर चंपावत राजकीय महाविद्यालय में है। छात्र-छात्राओं का कहना है कि सुबह 7 बजे से होने वाली परीक्षा में उन्हें चंपावत पहुंचने के लिए एक दिन पूर्व धन खर्च कर रहने की व्यवस्था करने को मजबूर होना पड़ता है। लिहाजा उनका केंद्र अमोड़ी में ही बनाया जाना चाहिए।
कोट
अमोड़ी राजकीय डिग्री कॉलेज में पढ़ाई लायक माहौल बनाने के प्रयास किए जा रहे हैं। जगह की कमी फिलहाल सबसे बड़ी बाधा है। इससे निजात पाने के लिए भवन निर्माण के काम में तेजी लाने की कवायद हो रही है। वहीं अंग्रेजी शिक्षक की तैनाती के लिए उच्च शिक्षा मंत्री से वार्ता हुई है।
उमाशंकर भट्ट,
जिला पंचायत सदस्य,
अमोड़ी क्षेत्र।