चंपावत जिले के पंचेश्वर में महाकाली नदी में प्रस्तावित है पंचेश्वर बांध।
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जिले में बहुउद्देश्यीय पंचेश्वर बांध परियोजना के निर्माण की कवायद दिनोंदिन जोर पकड़ती जा रही है। बहुउद्देश्यीय बांध परियोजना में पहली बार जल परिवहन की व्यवस्था भी की जा रही है। पंचेश्वर बांध परियोजना के बनने के बाद टनकपुर से घाट और घाट से जौलजीबी तक जल परिवहन की व्यवस्था रहेगी। इससे लोगों को यातायात सुविधा मिलेगी और विभिन्न स्थानों की दूरी कम हो जाएगी। जौलजीबी से टनकपुर की 110 किमी की दूरी महज 60 किमी ही रह जाएगी। बांध परियोजना का निर्माण पूरा होने पर राज्य को 250 मेगावाट बिजली मुफ्त में मिलेगी। केंद्रीय कपड़ा राज्यमंत्री और पंचेश्वर बांध समिति के सदस्य अजय टम्टा के अनुसार पंचेश्वर बांध निर्माण की डीपीआर में पहली बार जल परिवहन की व्यवस्था का प्रावधान किया गया है। बांध का जलाशय तैयार होने पर जहां नौकायन आदि को बढ़ावा मिलेगा, वहीं मोटरबोट, स्टीमर आदि माध्यमों को यातायात के साधन के रूप में प्रयुक्त किया जाएगा।
भारत, नेपाल के बीच महाकाली, सरयू नदी के संगम स्थल पंचेश्वर में बनने वाला प्रस्तावित बांध दुनिया का सबसे ऊंचा बांध होगा। इसकी ऊंचाई 312 मीटर होगी। यही नहीं सबसे ऊंचा बांध होने के साथ ही बिजली उत्पादन के मामले में भी पंचेेश्वर बांध परियोजना संसार में सबसे बड़ी परियोजना होगी। वाप्कोस कंपनी के प्रभारी मुख्य अभियंता आर गौतम के अनुसार पंचेेश्वर बांध का निर्माण बिजली उत्पादन के उद्देश्य से किया जा रहा है। पंचेेश्वर बांध से 4800 मेगावाट, मुख्य बांध से करीब 27 किमी दूर रुपालीगाड़ में 240 मेगावाट बिजली का उत्पादन होगा। जो बिजली उत्पादन में सबसे बड़ा होगा।
जिनपिंग-1 में 3600 मेगावाट का उत्पादन होता है
चंपावत। हिमालयी संसाधनों की थाह लेने वाले अध्ययनकर्ता और बांध विरोधी संगठन माटू से जुड़े विमल भाई का कहना है कि सर्वाधिक ऊंचा बांध जिनपिंग-1 चीन में है, जिसकी ऊंचाई 305 मीटर, विद्युत उत्पादन क्षमता 3600 मेगावाट है जबकि दूसरे सर्वाधिक ऊंचे बांध में तजाकिस्तान का नूरेक बांध है, जिसकी ऊंचाई 300 मीटर, उत्पादन क्षमता 3015 मेगावाट है। फिलीपींस में 210 मीटर ऊंचाई के सैनराक डैम से 345 मेगावाट, अमेरिका के 230 मीटर ऊंचे ओरोविल डैम से 819 मेगावाट, पाकिस्तान में 143 मीटर ऊंचाई के टरबेला बांध से 3478 मेगावाट, तुर्की में 166 मीटर ऊंचे अतातुर्क बांध से 2400 मेगावाट बिजली का उत्पादन किया जा रहा है। वह कहते हैं कि आंकड़े अथवा रिकार्ड के हिसाब से पंचेश्वर सबसे ऊंचा और सर्वाधिक बिजली उत्पादित करने वाला बांध बन सकता है, लेकिन पर्यावरणीय, मानवीय दृष्टिकोण से इतना बड़ा बांध बनाया जाना किसी भी स्तर में उचित नहीं है।