देवीधार की पहाड़ी पर है मां भगवती का प्राचीन मंदिर
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नगर के पास देवीधार की पहाड़ी पर स्थित मां भगवती का प्राचीन मंदिर लोगों की आस्था का अटूट केंद्र रहा है। यहां चैत्र और अश्विन नवरातों में श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ती है। यहां खाली हाथ आने वाला मां भगवती का उपासक झोली भरकर ले जाता है। वर्ष भर लोग मंदिर में पूजा अर्चना के लिए आते रहे हैं।
किवदंतियों के अनुसार प्राचीन समय में इस क्षेत्र के गांवों में महामारी फैल गई थी। इसके प्रकोप के चलते लोग अकाल मृत्यु को प्राप्त हो रहे थे। इस महामारी से बचने के लिए ग्रामीणों ने इस स्थान पर रात्रि जागरण कर मां भगवती की आराधना की। भक्तों की पुकार सुनकर मां भगवती उनके कष्ट को हरने के लिए आषाढ़ी पूर्णिमा को प्रकट हुई, जिसके बाद यहां फैली महामारी समाप्त हो गई और क्षेत्र में पुन: सुख, शांति, खुशहाली लौट आई। तब से प्रति वर्ष आषाढ़ी पूर्णिमा के दिन यहां विशाल मेला लगता है, जिसमें रायनगर चौड़ी, डैंसली, कलीगांव से मां भगवती और मां महाकाली की शोभायात्राएं निकलकर मां के दरबार में विसर्जित होती हैं। मंदिर के चारों ओर से रोड से जुड़ने के कारण यहां लोगों की भीड़ उमड़ने लगी है।