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प्रवासी भारतीय दिवस पर: सात समंदर पार से अपनी जड़ों को लेकर फिक्रमंद राज भट्ट

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एनआरआई राज भट्ट। - फोटो : CHAMPAWAT
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चंपावत। सात समंदर पार इंग्लैंड में नामी चार्टड एकाउंटेंट (सीए) राज भट्ट आज भी अपनी जड़ों के लिए फिक्रमंद हैं। इस दिशा में वह निरंतर काम कर रहे हैं। संसाधनों की कमी से आगे बढ़ने से वंचित प्रतिभाओं को मदद कर नई राह दिखाने के साथ ही 15 शिक्षण संस्थानों के बुनियादी ढांचे और संस्कृति संरक्षण में हाथ बंटा रहे हैं। इस नेक काम में वह हर साल 21 लाख रुपये दान कर रहे हैं।
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स्वतंत्रता सेनानी हर्षदेव ओली की पहचान से जुड़े खेतीखान क्षेत्र के सिर्तोली गांव के राज भट्ट (54) 19 वर्षों से इंग्लैंड में सीए हैं। इस समय इलारा कैपिटल के मुख्य अधिशासी अधिकारी के रूप में भी वह सेवा दे रहे हैं। ऊंचे ओहदे में होने के बावजूद भी वह अपने इलाके के लोगों से जुड़े हुए हैं। लोहाघाट, खेतीखान, टनकपुर के विवेकानंद विद्यामंदिर और प्राथमिक स्कूलों में कंप्यूटर, फर्नीचर से लेकर बुनियादी ढांचे की कमी को दूर करने में हर साल मदद कर रहे हैं। मुख्य शिक्षाधिकारी आरसी पुरोहित बताते हैं कि पिता स्वर्गीय लीलाधर भट्ट और मां हीरा देवी की स्मृति में पांच स्कूलों में 30 गरीब प्रतिभावान विद्यार्थियों को छात्रवृत्ति दे रहे हैं। मड़ पसौली के गोवात्सल्य सेवा केंद्र में 2016 से आर्थिक सहयोग कर रहे हैं। अंतरराष्ट्रीय स्तर में कराटे में जौहर दिखाने वाली तीन बालिकाओं की पढ़ाई का समूचा खर्च उठा रहे हैं। राज भट्ट ने इस साल अपने पैतृक गांव सिर्तोली में वेद विद्यालय शुरू किया। इस आवासीय स्कूल में संस्कृत के माध्यम से वेद की पढ़ाई हो रही है। साथ ही बागेश्वर जिले के बैजनाथ में संस्कृत महाविद्यालय भी शुरू किया है। राज भट्ट ने ऋषेश्वर महादेव मंदिर की दूसरी मंजिल का निर्माण कराएंगे।
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