प्रोन्नत वेतनमान की मांग को लेकर सेवानिवृत्त शिक्षक हरीश चंद्र जोशी मुख्य शिक्षाधिकारी कार्यालय के चक्कर काटते हुए थक चुके हैं। 10 वर्ष पहले सेवानिवृत्त हुए शिक्षक को अपना ही पैसा लेने के लिए विभागीय अधिकारियों के चक्कर काटने पड़ रहे हैं। विभागीय रवैये से तंग आकर अब वह न्यायालय का दरवाजा खटखटाने के लिए मजबूर हो चुके हैं।
उनका कहना है कि उन्हें 1990 से पदोन्नत वेतनमान का लाभ मिलना चाहिए था, लेकिन विभाग द्वारा इन्हें 2009 से अनुमन्य किया गया है, जबकि वह 2006 में ही सेवानिवृत्त हो गए थे। जोशी ने विभागीय अधिकारियों से पत्राचार करते हुए मोटी फाइल बना ली है। उनका कहना है कि विभाग ने कई सेवानिवृत्त शिक्षकों के प्रोन्नत वेतनमान संबंधी प्रकरणों का संशोधन कर दिया है, साथ ही उन्होंने यह भी दावा किया है कि कई शिक्षकों को शासनादेशों को ताक में रखकर मनमाने ढंग से लाभ पहुंचाया गया है।
इस संबंध में मुख्य शिक्षाधिकारी कार्यालय के अधीक्षक हेम चंद्र उप्रेती का कहना है कि इस मामले में सीईओ, डीईओ माध्यमिक और लेखाकार की एक समिति गठित की जा रही है, जो शीघ्र निर्णय लेगी।