जिले के कई सरकारी विभागों के पास अपने भवन नहीं है लेकिन यहां एक विभाग ऐसा भी है जिसके पास एक कार्यालय की दो इमारतें हैं। जिले की सबसे बड़ी निर्वाचित संस्था जिला पंचायत के पास दो कार्यालय भवन हैं। जबकि जरूरत एक की ही है। कई लोग इसे धन की बर्बादी बताते हुए पुराने भवन का जनहित में उपयोग करने की मांग कर रहे हैं।
1998 में सृजित चंपावत जिला पंचायत शुरू में चंपावत के पुराने प्राथमिक विद्यालय भवन में चला। बाद में पंचायत का लाखों रुपये की लागत से अपना नया भवन बना। 2014 में पंचायत का एक और नया भवन स्वीकृत हुआ। नवंबर 2016 में जिला पंचायत के 1.53 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित इस नए कार्यालय भवन का उद्घाटन हुआ।
इसके बाद जिला पंचायत अपने इस नए भवन में शिफ्ट हो गया। तब से पंचायत का कार्यालय एक भवन से संचालित हो रहा है। बैठक और चुनाव में पुरानी इमारत का भी कभी-कभार उपयोग हो जाता है। नागरिकों का कहना है कि जरूरत न होने के बावजूद जिला पंचायत दो कार्यालय चलाकर धन की बर्बादी कर रहा है। इस संबंध में पंचायतीराज विभाग को पत्र भी भेजा गया है।
जिला पंचायत कार्यालय की जरूरत के हिसाब से नया भवन बनाया गया था। नवंबर 2016 से इसी नई जगह पर कार्यालय को शिफ्ट किया गया है। पुराने भवन को किराये पर देने के लिए किसी संस्था से बात चल रही थी लेकिन संस्था के न आने से भवन खाली रह गया। अब पुराने भवन को सेवायोजन कार्यालय को किराये पर दिया जाएगा। राजेश कुमार, अपर मुख्य अधिकारी, जिला पंचायत, चंपावत।
किराये पर हैं कई कार्यालय
चंपावत। जिला बनने के 22 वर्ष बाद भी कई ऐसे विभाग हैं जिनके पास कार्यालय के लिए अपना भवन नहीं है। आयुर्वेदिक विभाग, सेवायोजन, खादी ग्रामोद्योग, उरेडा, जल संस्थान सहित कई कार्यालय किराये पर चल रहे हैं। इसमें विभागों की मोटी रकम भी खर्च हो रही है।
जिला पंचायत का पुराना कार्यालय भवन।- फोटो : CHAMPAWAT