कवि सुमित्रा नंदन पंत की जयंती के उपलक्ष्य में सूखीढांग में काव्यपाठ का आयोजन हुआ। रचनाकारों ने कवि पंत को समर्पित अपनी कविता सुनाकर उन्हें श्रद्धांजलि दी।
कवि आदर्श कुमार जैन की अध्यक्षता में आयोजित काव्यपाठ का शुभारंभ बतौर मुख्य अतिथि कवि रवींद्र पांडेय पपीहा ने कवि पंत के चित्र पर दीप प्रज्ज्वलित कर किया। पं. शंकर दत्त जोशी ने अपनी रचना में कहा कि- हे प्रकृति के सुकुमार, करते जन्मदिन पर वंदन। हे नवसृजन के जन्मदाता, आज मनाए एक सौ पंद्रहवां जन्मदिन।
बाल कवि उमेश जोशी ने अपनी रचना में किसानों के दर्द को बयां करते हुए कहा कि-उठो किसानों जागो, अपनी निंद्रा त्यागो, हल बैलों को लेकर खेत जोतन लागो।। बनबसा से अपने कवि रवींद्र पांडेय ने देश की दुर्दशा पर कहा कि- छोड़कर गया था जिसे अब वो झलक नहीं, मेरे गांव को जाती थी ये वो सड़क नहीं। जनकवि शूल ने कहा कि- है जवाब हर किसी का शूल इस जगत में, कोई आप जैसा लाजबाब नहीं होता। वही हारता है जंग जिंदगी की अक्सर, नैनो में जिसके कोई भी ख्वाब नहीं होता। इसके अलावा बनबसा के युवा कवि दिनेश चंद, टनकपुर के दिनेश चंद्र शास्त्री, आचार्य रामदेव, जय चंद्र प्रसाद मनुज आदि ने भी रचनाएं सुनाई।